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प्रॉपर्टी विवाद में हत्या का प्रयास करने वालों को कारवास की सजा 17-58-51-compat
Updated Mon, 23 Jul 2018 10:40 PM IST
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नई टिहरी। अपर जिला जज नीना अग्रवाल की अदालत ने मुनिकीरेती स्थित सच्चाधाम आश्रम में तीन साल पूर्व हुए प्रापर्टी विवाद में आश्रम के चेला (अनुयायी) रविंद्र ब्रह्मचारी की हत्या के प्रयास के आरोप में मुख्य अभियुक्त को सात वर्ष और अन्य तीन अभियुक्तों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता बेणी माधव शाह ने बताया कि सच्चाधाम आश्रम मुनिकीरेती के हंसजी महाराज ने एक वसीयत अपने चेले रविंद्र ब्रह्मचारी के पक्ष में लिखी थी। इसका आश्रम में रहे अन्य लोगों ने विरोध किया। दोनों पक्षों में इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ। इसी रंजिश के तहत 29 जुलाई 2015 को रात करीब पौने 12 बजे आश्रम में रविंद्र ब्रह्मचारी पर कुछ लोगों ने गोली चला दी, जो उनके घुटने मेें लग गई। अगले दिन आश्रम में रह रहे अजय स्वामी ने घटना की सूचना थाना मुनिकीरेती में दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज की, लेकिन छानबीन करने के बजाए रिपोर्ट लिखने वालों से साक्ष्य लाने को कहा। पुलिस ने दो बार अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। घटना में चोटिल हुए रविंद्र ब्रह्मचारी ने अंतिम रिपोर्ट का कोर्ट में विरोध किया, जिसके बाद कोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया और अभियुक्तों को आईपीसी की धारा 307, 504 और 109 के तहत तलब किया। गवाहों ने घटना को पुख्ता करते हुए रविंद्र ब्रह्मचारी पर जानलेवा हमले को साबित किया। सोमवार को अपर जिला जज नीना अग्रवाल की अदालत ने मुख्य अभियुक्त ऋषि पुत्र वेद प्रकाश निवासी मुजफ्फरनगर को सात वर्ष का कठोर कारावास व दस हजार अर्थदंड, सह अभियुक्त रमेश मिश्र, स्वामी बलदेव, ब्रजपाल उर्फ बाबा को पांच-पांच साल का कठोर कारावास व पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता बेणी माधव शाह ने बताया कि सच्चाधाम आश्रम मुनिकीरेती के हंसजी महाराज ने एक वसीयत अपने चेले रविंद्र ब्रह्मचारी के पक्ष में लिखी थी। इसका आश्रम में रहे अन्य लोगों ने विरोध किया। दोनों पक्षों में इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ। इसी रंजिश के तहत 29 जुलाई 2015 को रात करीब पौने 12 बजे आश्रम में रविंद्र ब्रह्मचारी पर कुछ लोगों ने गोली चला दी, जो उनके घुटने मेें लग गई। अगले दिन आश्रम में रह रहे अजय स्वामी ने घटना की सूचना थाना मुनिकीरेती में दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज की, लेकिन छानबीन करने के बजाए रिपोर्ट लिखने वालों से साक्ष्य लाने को कहा। पुलिस ने दो बार अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। घटना में चोटिल हुए रविंद्र ब्रह्मचारी ने अंतिम रिपोर्ट का कोर्ट में विरोध किया, जिसके बाद कोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया और अभियुक्तों को आईपीसी की धारा 307, 504 और 109 के तहत तलब किया। गवाहों ने घटना को पुख्ता करते हुए रविंद्र ब्रह्मचारी पर जानलेवा हमले को साबित किया। सोमवार को अपर जिला जज नीना अग्रवाल की अदालत ने मुख्य अभियुक्त ऋषि पुत्र वेद प्रकाश निवासी मुजफ्फरनगर को सात वर्ष का कठोर कारावास व दस हजार अर्थदंड, सह अभियुक्त रमेश मिश्र, स्वामी बलदेव, ब्रजपाल उर्फ बाबा को पांच-पांच साल का कठोर कारावास व पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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