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बंदूक लाइसेंस के नवीनिकरण शुल्क में भारी बढोतरी
Updated Fri, 16 Mar 2018 10:55 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। काश्तकारों को आत्मरक्षा के साथ ही जंगली जानवरों से खेती की सुरक्षा के लिए वर्षों पहले सरकार ने जरूरतमंदों को बंदूकों के परमिट जारी किए थे। तीसरे साल परमिट का नवीनीकरण करने पर 60 रुपये फीस ली जाती थी, लेकिन अब सरकार ने फीस में भारी बढ़ोत्तरी करते हुए नवीनीकरण की फीस 15 सौ रुपये कर दी है, जिससे काश्तकारों के लिए बंदूक के लाइसेंस का नवीनीकरण करना खासा मुश्किल हो गया है।
तहसील क्षेत्र के बंदूक लाइसेंस धारी अव्वल सिंह, इंद्र सिंह, मकान सिंह, जबर सिंह, कुंवर सिंह आदि लोगों ने बताया कि उन्होंने वर्षों पहले जंगली जानवरों से खेती बचाने और आत्म रक्षा के उद्देश्य से बंदूक का लाइसेंस लिया था। नियमानुसार हर तीसरे साल 60 रुपये में लाइसेंस का नवीनीकरण हो रहा था, लेकिन सरकार ने इस साल इसमें कई गुना बढ़ोत्तरी करते हुए शुल्क 15 सौ रुपये कर दिया है। यही नहीं एक माह देर होने पर जहां दो सौ रुपये विलंब शुल्क लिया जाता था, उसमें भी कई गुना बढ़ोत्तरी कर दो हजार रुपये कर दिया है। इससे लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बंदूक अक्सर खेतों से जंगली जानवरों को भगाने के ही काम आती है, लेकिन अब फीस बढ़ाने से लाइसेंस लेना खासा मुश्किल हो गया है।
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तहसील क्षेत्र के बंदूक लाइसेंस धारी अव्वल सिंह, इंद्र सिंह, मकान सिंह, जबर सिंह, कुंवर सिंह आदि लोगों ने बताया कि उन्होंने वर्षों पहले जंगली जानवरों से खेती बचाने और आत्म रक्षा के उद्देश्य से बंदूक का लाइसेंस लिया था। नियमानुसार हर तीसरे साल 60 रुपये में लाइसेंस का नवीनीकरण हो रहा था, लेकिन सरकार ने इस साल इसमें कई गुना बढ़ोत्तरी करते हुए शुल्क 15 सौ रुपये कर दिया है। यही नहीं एक माह देर होने पर जहां दो सौ रुपये विलंब शुल्क लिया जाता था, उसमें भी कई गुना बढ़ोत्तरी कर दो हजार रुपये कर दिया है। इससे लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बंदूक अक्सर खेतों से जंगली जानवरों को भगाने के ही काम आती है, लेकिन अब फीस बढ़ाने से लाइसेंस लेना खासा मुश्किल हो गया है।
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