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सीमांत क्षेत्र के चार गांवों को सड़क का इंतजार
Updated Sat, 24 Feb 2018 10:56 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। राज्य गठन के 17 वर्ष बाद भी भिलंगना ब्लॉक के चार सीमांत गांव आज भी मोटर मार्गों से नहीं जुड़ पाए हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों को 10 से 15 किमी पैदल चलना पड़ रहा है। गांव तक सड़क नहीं पहुंचने से वह गांव विकास की दौड़ में पिछड़ते जा रहे हैं। ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
ब्लॉक के सीमांत गांव गंगी, गेंवाली, पिनस्वाड़ और गेवली गांवों के लोग विकट और विषम भौगोलिक परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। आजादी के बाद से आज तक गांवों में सड़क नहीं पहुंचना विडंबना है। यहां के लोगों में गांवों के विकास की आस एक बार तब जरूर जगी थी, जब पृथक राज्य आंदोलन के लिए स्व. इंद्रमणी बडोनी ने पौड़ी में भूखहड़ताल शुरू की थी। इन सीमांत गांवों के पर्यटक स्थलों के साथ प्रकृति का सौंदर्य का प्रचार-प्रसार करने के लिए सड़कों का विकास और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए के लिए उन्होंने खतलिंग पंवाली, भांसरताल, हटकुणी आदि पद यात्राएं भी चलाई थी। बावजूद ये गांव आज भी उपेक्षा के शिकार हैं। प्रधान बचन सिंह रावत, नैन सिंह, धर्म सिंह, गोपाल सिंह, भरत सिंह आदि का कहना है कि ग्रामीण वर्षों से गांवों को सड़क से जोडंने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पीएमजीएसवाई गंगी के लिए रीह-गंगी, पिनस्वाड़ के लिए अगुंडा- पिनस्वाड़ सड़क बना रहा है। ईई राजेश कुमार का कहना है कि गंगी और पिनस्वाड़ मोटर मार्ग का कार्य दिसंबर 18 तक पूरा कर लिया जाएगा। गेंवाली गांव के लिए डीपीआर बना कर सरकार के पास वन भूमि हस्तांतरण को भेजा गया है।
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ब्लॉक के सीमांत गांव गंगी, गेंवाली, पिनस्वाड़ और गेवली गांवों के लोग विकट और विषम भौगोलिक परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। आजादी के बाद से आज तक गांवों में सड़क नहीं पहुंचना विडंबना है। यहां के लोगों में गांवों के विकास की आस एक बार तब जरूर जगी थी, जब पृथक राज्य आंदोलन के लिए स्व. इंद्रमणी बडोनी ने पौड़ी में भूखहड़ताल शुरू की थी। इन सीमांत गांवों के पर्यटक स्थलों के साथ प्रकृति का सौंदर्य का प्रचार-प्रसार करने के लिए सड़कों का विकास और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए के लिए उन्होंने खतलिंग पंवाली, भांसरताल, हटकुणी आदि पद यात्राएं भी चलाई थी। बावजूद ये गांव आज भी उपेक्षा के शिकार हैं। प्रधान बचन सिंह रावत, नैन सिंह, धर्म सिंह, गोपाल सिंह, भरत सिंह आदि का कहना है कि ग्रामीण वर्षों से गांवों को सड़क से जोडंने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पीएमजीएसवाई गंगी के लिए रीह-गंगी, पिनस्वाड़ के लिए अगुंडा- पिनस्वाड़ सड़क बना रहा है। ईई राजेश कुमार का कहना है कि गंगी और पिनस्वाड़ मोटर मार्ग का कार्य दिसंबर 18 तक पूरा कर लिया जाएगा। गेंवाली गांव के लिए डीपीआर बना कर सरकार के पास वन भूमि हस्तांतरण को भेजा गया है।
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