{"_id":"5a412bb64f1c1bd0408bef3b","slug":"151422062715-new-tehri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंबा में गोवंश संरक्षण अधिनियम बना मजाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंबा में गोवंश संरक्षण अधिनियम बना मजाक
Updated Mon, 25 Dec 2017 10:22 PM IST
विज्ञापन
चंबा (टिहरी)। प्रदेश में गोवंश संरक्षण अधिनियम लागू हुए दस साल हो चुका है, लेकिन आज भी गोवंश जगह-जगह सड़कों में घूम रहे हैं। स्थिति यह है कि पालिका गोवंश के लिए कांजी हाउस की व्यवस्था तक नहीं कर पाया।
19 जुलाई 2007 को गोवंश संरक्षण अधिनियम लागू हुआ था, लेकिन आजतक इस पर कोई काम नहीं हो पाया। स्थिति यह है कि क्षेत्र में जगह-जगह गोवंश सड़कों में घूम रहे हैं। अधिनियम के तहत कोई भी गोवंश को निराश्रित नहीं छोड़ेगा। गोवंश की पहचान के लिए उनके शरीर में रेडियो फ्रीक्वेंशी आई डेंटिफिकेशन डिवाइस लगाई जाएगी, जिससे गाय के मालिक और लोकेशन का पता चल सके। विजेंद्र धनोला, पूरण सिंह चौहान का कहना है कि नगर में निराश्रित गोवंश के पानी पीने तक के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ईओ एसपी जोशी का कहना है कि कांजी हाउस बनाने के लिए भूमि नहीं मिल रही है। जगह मिलते ही निर्माण शुरू किया जाएगा।
विज्ञापन
19 जुलाई 2007 को गोवंश संरक्षण अधिनियम लागू हुआ था, लेकिन आजतक इस पर कोई काम नहीं हो पाया। स्थिति यह है कि क्षेत्र में जगह-जगह गोवंश सड़कों में घूम रहे हैं। अधिनियम के तहत कोई भी गोवंश को निराश्रित नहीं छोड़ेगा। गोवंश की पहचान के लिए उनके शरीर में रेडियो फ्रीक्वेंशी आई डेंटिफिकेशन डिवाइस लगाई जाएगी, जिससे गाय के मालिक और लोकेशन का पता चल सके। विजेंद्र धनोला, पूरण सिंह चौहान का कहना है कि नगर में निराश्रित गोवंश के पानी पीने तक के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ईओ एसपी जोशी का कहना है कि कांजी हाउस बनाने के लिए भूमि नहीं मिल रही है। जगह मिलते ही निर्माण शुरू किया जाएगा।
विज्ञापन