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सनातन धर्मावलंबियों की आस्था को देखते हुए आदेश वापस ले सरकार
Updated Thu, 14 Dec 2017 10:30 PM IST
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चंबा (टिहरी)। राष्ट्रीय हरित विकास प्राधिकरण (एनजीटी) के अमरनाथ यात्रा में मंत्रोच्चारण और घंटा बजाने पर रोक के फैसले पर संत समाज और पर्यावरणविदों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सनातन धर्मावलंबियों की आस्था को देखते हुए सरकार से शीघ्र आदेश को वापस लेने की मांग की है।
पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि में घंटी और मंत्रोच्चारण से वातावरण में सकारात्मक तरंगे प्रवाहित होती हैं। ध्वनि प्रदूषण समाप्त होता है। भारत के शास्त्रीय संगीत का मूलस्रोत सामवेद है, जिसमें मंत्रों के लयबद्ध का अपना विशेष महत्व है। ऐसे में पवित्र अमरनाथ गुफा के बाहर तीर्थयात्रियों के जप और जयकारों से पर्यावरण को कैसे नुकसान पहुंचेगा। इसलिए एनजीटी का फैसला धार्मिक-वैज्ञानिक और आस्था के दृष्टिगत पुनर्विचारणीय है।
अखिल भारतीय तीर्थ रक्षा सम्मान समिति के अध्यक्ष योगी राकेश नाथ ने एनजीटी के मंत्रों और जयकारों पर पाबंदी की निंदा करते हुए इस पर पुनर्विचार किए जाने की बात कही। कहा कि सनातन धर्मावलंबियों की आस्था और भावनाओं को देखते हुए तुगलकी फरमान वापस लिया जाना चाहिए। स्वामी रामतीर्थ आश्रम समिति टिहरी के अध्यक्ष काका हरिओम ने कहा कि धातुओं से बने घंटों से सुनिश्चित लय में उठने वाली ध्वनि पूरे वातावरण को और उससे प्रभावित होने वाले क्षेत्र मेें रहने वाले व्यक्ति के तन-मन को ऊर्जा से स्पंदित कर देती है। पर्यावरणविद् जगत सिंह चौधरी जंगली ने कहा कि घंटी और मंत्रोच्चार से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। कहा कि हिमलिंग की सुरक्षा को देखते हुए रासायनिक धूपबतियों की जगह जैविक धूपबत्ती जलाई जानी चाहिए।
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पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि में घंटी और मंत्रोच्चारण से वातावरण में सकारात्मक तरंगे प्रवाहित होती हैं। ध्वनि प्रदूषण समाप्त होता है। भारत के शास्त्रीय संगीत का मूलस्रोत सामवेद है, जिसमें मंत्रों के लयबद्ध का अपना विशेष महत्व है। ऐसे में पवित्र अमरनाथ गुफा के बाहर तीर्थयात्रियों के जप और जयकारों से पर्यावरण को कैसे नुकसान पहुंचेगा। इसलिए एनजीटी का फैसला धार्मिक-वैज्ञानिक और आस्था के दृष्टिगत पुनर्विचारणीय है।
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अखिल भारतीय तीर्थ रक्षा सम्मान समिति के अध्यक्ष योगी राकेश नाथ ने एनजीटी के मंत्रों और जयकारों पर पाबंदी की निंदा करते हुए इस पर पुनर्विचार किए जाने की बात कही। कहा कि सनातन धर्मावलंबियों की आस्था और भावनाओं को देखते हुए तुगलकी फरमान वापस लिया जाना चाहिए। स्वामी रामतीर्थ आश्रम समिति टिहरी के अध्यक्ष काका हरिओम ने कहा कि धातुओं से बने घंटों से सुनिश्चित लय में उठने वाली ध्वनि पूरे वातावरण को और उससे प्रभावित होने वाले क्षेत्र मेें रहने वाले व्यक्ति के तन-मन को ऊर्जा से स्पंदित कर देती है। पर्यावरणविद् जगत सिंह चौधरी जंगली ने कहा कि घंटी और मंत्रोच्चार से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। कहा कि हिमलिंग की सुरक्षा को देखते हुए रासायनिक धूपबतियों की जगह जैविक धूपबत्ती जलाई जानी चाहिए।
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