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परिवार और समाज के प्रति छात्रों में सकारात्मक सोच विकसित करने की जरूरत
Updated Sun, 29 Oct 2017 10:06 PM IST
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नई टिहरी। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नई टिहरी में रविवार को स्वावलंबी पूर्व छात्र सम्मेलन आयोजित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि विद्या भारती सबको एक साथ लेकर चलती है।
मुख्य अतिथि सीडीओ आशीष भटगाईं, पालिकाध्यक्ष उमेश चरण गुसाईं और विद्या भारती के प्रदेश निरीक्षक सत्य प्रकाश बंगवाल ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। सीडीओ भटगाईं ने कहा कि शिशु मंदिर और विद्या मंदिर में अनुशासन अच्छा है। संस्कार और संस्कृति की शिक्षा भी विद्या भारती के स्कूली में अच्छी मिलती है, लेकिन आधुनिक समय में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की जरूरत है। पालिकाध्यक्ष गुसाईं ने कहा कि छात्रों के मन में सकारात्मक सोच विकसित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। प्रदेश निरीक्षक बंगवाल ने बताया कि 1952 में गौरखपुर में सबसे पहले शिशु मंदिर की स्थापना हुई थी।
संचालन प्रधानाचार्य देवी प्रसाद नौटियाल ने किया। इस मौके पर प्रधानाचार्य इंद्र सिंह परमार, मोहन सिंह कुमाईं, राकेश बडोनी, भगत सिंह भंडारी, मोहन सिंह रावत, स्वराज पंवार, संजीव भट्ट, कमलेश्वर बडोनी, टीटी राणा आदि उपस्थित रहे।
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मुख्य अतिथि सीडीओ आशीष भटगाईं, पालिकाध्यक्ष उमेश चरण गुसाईं और विद्या भारती के प्रदेश निरीक्षक सत्य प्रकाश बंगवाल ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। सीडीओ भटगाईं ने कहा कि शिशु मंदिर और विद्या मंदिर में अनुशासन अच्छा है। संस्कार और संस्कृति की शिक्षा भी विद्या भारती के स्कूली में अच्छी मिलती है, लेकिन आधुनिक समय में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की जरूरत है। पालिकाध्यक्ष गुसाईं ने कहा कि छात्रों के मन में सकारात्मक सोच विकसित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। प्रदेश निरीक्षक बंगवाल ने बताया कि 1952 में गौरखपुर में सबसे पहले शिशु मंदिर की स्थापना हुई थी।
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संचालन प्रधानाचार्य देवी प्रसाद नौटियाल ने किया। इस मौके पर प्रधानाचार्य इंद्र सिंह परमार, मोहन सिंह कुमाईं, राकेश बडोनी, भगत सिंह भंडारी, मोहन सिंह रावत, स्वराज पंवार, संजीव भट्ट, कमलेश्वर बडोनी, टीटी राणा आदि उपस्थित रहे।
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