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रावण ने सीता का हरण किया
Updated Sat, 30 Sep 2017 10:39 PM IST
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नई टिहरी। बौराड़ी स्टेडियम में आयोजित रामलीला मंचन में सीता हरण का मंचन किया गया। रामलीला में लक्ष्मण की ओर से सूपर्णखा की नाक काटे जाने पर वह रावण के पास पहुंचकर आपबीती सुनाती है। यह सुन रावण मामा मारीच से स्वर्ण मृग बनकर पंचवटी जाने को कहते हैं। स्वर्ण मृग को देख सीता राम से स्वर्ण मृग लाने की जिद करने लगीं। राम स्वर्ण मृग का पीछा कर वन में बहुत दूर निकल जाते हैं। इतने में मायावी मृग गायब हो जाता है। राम के काफी देर तक न आने पर सीता लक्ष्मण को वन की ओर भेजती हैं। इसी बीच रावण साधु वेश में आकर सीता से भिक्षा मांगता है और छल से सीता का हरण कर लेता है। उधर लक्ष्मण को वन में देख राम को अनहोनी की आशंका होती है। राम और लक्ष्मण पंचवटी लौटते हैं और वहां पर सीता को न देख दुखी हो जाते हैं। जटायु से सूचना मिलती है कि रावण सीता को किष्किंधा पर्वत की ओर ले गया है। राम-लक्ष्मण पर्वत की ओर जाने लगते है और उनकी हनुमान से भेंट होती है। हनुमान उन्हें सुग्रीव से मिलाते है तो सुग्रीव राम को सीता की ओर से फेंके जेवर दिखाते हैं। इसके बाद राम सुग्रीव से सीता की खोज में मदद मांगते हैं।