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जीवनदायिनी 10
Updated Fri, 15 Sep 2017 10:43 PM IST
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नैनबाग (टिहरी)। पहाड़ में जीवनदायिनी समझी जाने वाली 108 सेवा पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही है। 108 के टायर पंक्चर होने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नैनबाग में एक गर्भवती महिला तीन घंटे तक दर्द से कराहती रही। इस अव्यवस्था पर परिजनों ने जमकर अस्पताल में हंगामा काटा। बाद में विकासनगर से दूसरी 108 सेवा मंगवाकर महिला को सही सलामत दून अस्पताल पहुंचाया गया।
शुक्रवार सुबह ग्राम भुटगांव की बिंद्रा देवी (23) पत्नी संदीप राणा को प्रसव पीड़ा हुई। इस पर परिजनों ने 108 को संपर्क किया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की 108 एंबुलेंस जैसे तैसे भुटगांव पहुंचकर महिला को अस्तपाल लेकर पहुंची, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही उसका एक टायर पंक्चर हो गया। इसके तीन अन्य टायर पहले से घिसे हुए थे। नैनबाग स्वास्थ्य केंद्र पहुंची गर्भवती महिला को डाक्टरों ने देहरादून रेफर कर दिया, लेकिन 108 का टायर पंक्चर होने के चलते समस्या हुई कि गभर्वती महिला दून कैसे ले जाया जाए। अस्पताल में भी कोई दूसरी एंबुलेंस नहीं थी। इस पर परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। इस दौरान महिला तीन घंटे तक तड़पती रही। तीन घंटे बाद विकासनगर से दूसरी एंबुलेंस पहुंची जिसने शाम छह बजे महिला कोे दून अस्पताल सही सलामत पहुंचा दिया।
108 सेवा के मीडिया प्रभारी मनोज राणा का कहना है कि प्रदेश में 138 एंबुलेंस हैं। अधिकांश वाहन खराब हो गए हैं। नए वाहनों के लिए शासन को बजट की डिमांड भेजी गई है। 5 सिंतबर को कोटीकॉलोनी जाख में बाइक सवार एक घायल को लेने गई 108 सेवा की एंबुलेस ब्रेक फेल होने से दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस दुर्घटना में 108 सेवा के वाहन चालक और अन्य स्टाफ भी घायल हो गए थे। 10 सितंबर को भिलंगना ब्लॉक की मोल्डा गांव की एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए 108 सेवा नहीं मिली तोे उसे दुग्ध वाहन में अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसने वाहन में ही बच्चे को जन्म दिया।
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108 नहीं मिली तो गर्भवती को निजी वाहन से अस्पताल ले गए परिजन
वाहन तक पांच किमी डंडी से पैदल लाए महिला को
उत्तरकाशी। भटवाड़ी तहसील की भंकोली गांव में बृहस्पतिवार देर रात प्रसव पीड़िता के लिए 108 एंबुलेंस नहीं मिली। इसके चलते ग्रामीण और परिजन निजी वाहन से देर रात 3.30 बजे महिला को उत्तरकाशी जिला अस्पताल ले गए, जहां शुक्रवार तड़के चार बजे महिला ने बच्चे को जन्म दिया। प्रसव पीड़िता के पिता प्यार सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार की रात करीब 12 बजे प्रसव पीड़िता बेटी को वे डंडी से भंकोली गांव से पांच किलोमीटर पैदल चलकर संगम चट्टी लाए। 108 सेवा को फोन किया, लेकिन 108 संचालकों ने गाड़ी खराब होने की बात कही। इसके बाद उन्हें गजोली गांव में एक मैक्स चालक को जगाना पड़ा। तब जाकर वे बेटी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।
शुक्रवार सुबह ग्राम भुटगांव की बिंद्रा देवी (23) पत्नी संदीप राणा को प्रसव पीड़ा हुई। इस पर परिजनों ने 108 को संपर्क किया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की 108 एंबुलेंस जैसे तैसे भुटगांव पहुंचकर महिला को अस्तपाल लेकर पहुंची, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही उसका एक टायर पंक्चर हो गया। इसके तीन अन्य टायर पहले से घिसे हुए थे। नैनबाग स्वास्थ्य केंद्र पहुंची गर्भवती महिला को डाक्टरों ने देहरादून रेफर कर दिया, लेकिन 108 का टायर पंक्चर होने के चलते समस्या हुई कि गभर्वती महिला दून कैसे ले जाया जाए। अस्पताल में भी कोई दूसरी एंबुलेंस नहीं थी। इस पर परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। इस दौरान महिला तीन घंटे तक तड़पती रही। तीन घंटे बाद विकासनगर से दूसरी एंबुलेंस पहुंची जिसने शाम छह बजे महिला कोे दून अस्पताल सही सलामत पहुंचा दिया।
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108 सेवा के मीडिया प्रभारी मनोज राणा का कहना है कि प्रदेश में 138 एंबुलेंस हैं। अधिकांश वाहन खराब हो गए हैं। नए वाहनों के लिए शासन को बजट की डिमांड भेजी गई है। 5 सिंतबर को कोटीकॉलोनी जाख में बाइक सवार एक घायल को लेने गई 108 सेवा की एंबुलेस ब्रेक फेल होने से दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस दुर्घटना में 108 सेवा के वाहन चालक और अन्य स्टाफ भी घायल हो गए थे। 10 सितंबर को भिलंगना ब्लॉक की मोल्डा गांव की एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए 108 सेवा नहीं मिली तोे उसे दुग्ध वाहन में अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसने वाहन में ही बच्चे को जन्म दिया।
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108 नहीं मिली तो गर्भवती को निजी वाहन से अस्पताल ले गए परिजन
वाहन तक पांच किमी डंडी से पैदल लाए महिला को
उत्तरकाशी। भटवाड़ी तहसील की भंकोली गांव में बृहस्पतिवार देर रात प्रसव पीड़िता के लिए 108 एंबुलेंस नहीं मिली। इसके चलते ग्रामीण और परिजन निजी वाहन से देर रात 3.30 बजे महिला को उत्तरकाशी जिला अस्पताल ले गए, जहां शुक्रवार तड़के चार बजे महिला ने बच्चे को जन्म दिया। प्रसव पीड़िता के पिता प्यार सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार की रात करीब 12 बजे प्रसव पीड़िता बेटी को वे डंडी से भंकोली गांव से पांच किलोमीटर पैदल चलकर संगम चट्टी लाए। 108 सेवा को फोन किया, लेकिन 108 संचालकों ने गाड़ी खराब होने की बात कही। इसके बाद उन्हें गजोली गांव में एक मैक्स चालक को जगाना पड़ा। तब जाकर वे बेटी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।