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ग्लोबल वार्मिंग की मारी, पहाड़ की नारी

Fri, 08 Sep 2017 10:27 PM IST
Updated Fri, 08 Sep 2017 10:27 PM IST
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ग्लोबल वार्मिंग की मारी, पहाड़ की नारी

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चंबा (टिहरी)। ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ पिघलने, तापमान बढ़ने और मौसम चक्र गड़बड़ाने की बातें तो सभी जानते हैं, लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पहाड़ की महिलाओं के कंधों का बोझ बढ़ता जा रहा है। उनका तर्क है कि महिलाएं ही पहाड़ की आजीविका की रीढ़ हैं, इसलिए मौसम चक्र बदलने, जंगलों के सिमटने, जलस्त्रोतों के छीनते जाने और खेतीबाड़ी के चक्र में आए बदलाव का असर महिलाओं पर पड़ा है। जलवायु परिवर्तन के कारण महिलाओं को घास और पानी के लिए दूर जाना पड़ रहा है।
मध्य हिमालयी क्षेत्र के मौसम में पिछले कुछ सालों से काफी परिवर्तन आ गया है। पर्वतीय परिसर रानीचौरी मौसम विभाग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि टिहरी क्षेत्र के मौसम में पिछले 25 सालों में 2001 से पहले अधिकतम तापमान 0.16 डिग्री प्रति पांच वर्ष के हिसाब से बढ़ा था, लेकिन अब तक औसत तापमान में 0.3 से 0.6 की बढ़ोतरी हुई है। वहीं न्यूनतम तापमान 0.12 डिग्री प्रति पांच वर्ष के हिसाब से घट रहा है। खास बात यह है कि 25 साल में वर्षा की मात्रा में 23.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि बारिश के दिनों की संख्या में 17.6 प्रतिशत की कमी आई है। इसके साथ ही पिछले 10 साल में भारी वर्षा की आवृत्ति में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 25 वर्षों में 2001 से पहले 10 सालों में 2 बार सूखा पड़ा था तो 2001 से अब तक 3 बार सूखा पड़ चुका हैं। 25 वर्ष में बर्फबारी में 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। बर्फबारी कम होने से कीटों की समस्या बढ़ने लगी है।
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टिहरी क्षेत्र के विभिन्न गांवों में ग्लोबल वार्मिंग के असर पर शोध कर चुके इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट, काठमांडू के शोध कंसलटेंट अनमोल जैन कहते हैं कि मौसम के बदलाव से किसानों की दिनचर्या, आजीविका और कृषि पर प्रभाव पड़ा है। पर्यावरणविद विजय जड़धारी का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण जलस्त्रोत सूखने और चारा पत्ती का संकट बढ़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण महिलाओं को मजबूरन दूर जाना पड़ रहा है।
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इनका कहना
जंगल में बढ़ते मानवीय दखल के कारण जलवायु परिवर्तन में तेजी आ रही है। पहाड़ में वाहनों का बढ़ता प्रदूषण, बढ़ती जनंसख्या और जंगलों का दोहन काफी हद तक ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार है। -प्रकाश नेगी, तकनीकी शोध अधिकारी, रानीचौरी परिसर मौसम विभाग


ज्यादा देर तक सिर पर भारी सामान ढोने से महिलाओं में सरवाइकल स्पांडलाइटिस की शिकायतें बढ़ी हैं। पीठ पर अधिक बोझ से लंबर स्पांडलाइटिस (कमर दर्द) के भी मामले सामने आ रहे हैं। ओल्ड ऐज में महिलाओं को कई परेशानियां झेलनी पड़ती है। -डा. जेएन नौटियाल, फिजिशियन दून अस्पताल
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