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लावारिश हालत में लोनिवि ने छोड़ा हनुमान मंदिर पुल
Updated Mon, 07 Aug 2017 10:24 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। भिलंगना नदी पर हनुमान मंदिर पुल मरम्मत और देखरेख के अभाव मेें जर्जर हो गया है, जो आए दिन दुर्घटना को न्योता दे रहा है। बजट का अभाव बताकर लोनिवि ने पुल की मरम्मत करने से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
80 के दशक में घनसाली में भिलंगना नदी पर हनुमान मंदिर पुल का निर्माण किया गया था। पुल से प्रतिदिन केमर, बासर, आरगढ, गोनगढ, बूढाकेदार, भिलंग के साथ ढुगमंदार पट्टी की हजारों जनसंख्या के साथ चारधाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री आवागमन करते हैं। मरम्मत के अभाव में पुल की स्थिति जर्जर बनी है। पुल की खस्ताहाल स्थिति को देखते पांच वर्ष पूर्व लोनिवि ने भिलंगना नदी से पुल को स्पोर्ट देने के लिए लोहे के एंगल लगाए थे, लेकिन वह नदी में बाढ़ आने के कारण तीन साल पहले बह गए थे। पुल में बने बड़े-बड़े गड्ढों को ढकने के लिए लोहे की चादरें डाली गई थी, लेकिन तब से अब तक पुल की सुरक्षा के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य डा. नरेंद्र डंगवाल, गोविंद बडोनी, धूम सिंह जखेडी, आनंद व्यास, धर्म सिंह बिष्ट, तेजराम सेमवाल, दिनेश लाल, भजन सिंह का कहना है कि पुल की स्थिति नाजुक बनी है। पुल कभी भी गिर सकता है। पुल के गड्ढों को ढकने के लिए उसके ऊपर से डाली गई लोहे की चादरें जंक लगने से सड़ गई है।
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कोट
बजट के अभाव में हनुमान मंदिर पुल का मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है। पुल की खस्ताहाल स्थिति को देखते हुए आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों से वार्ता कर उनको साइट दिखा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुल को खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं है।
-जगमोहन सिंह चौहान, प्रभारी ईई लोनिवि घनसाली
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80 के दशक में घनसाली में भिलंगना नदी पर हनुमान मंदिर पुल का निर्माण किया गया था। पुल से प्रतिदिन केमर, बासर, आरगढ, गोनगढ, बूढाकेदार, भिलंग के साथ ढुगमंदार पट्टी की हजारों जनसंख्या के साथ चारधाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री आवागमन करते हैं। मरम्मत के अभाव में पुल की स्थिति जर्जर बनी है। पुल की खस्ताहाल स्थिति को देखते पांच वर्ष पूर्व लोनिवि ने भिलंगना नदी से पुल को स्पोर्ट देने के लिए लोहे के एंगल लगाए थे, लेकिन वह नदी में बाढ़ आने के कारण तीन साल पहले बह गए थे। पुल में बने बड़े-बड़े गड्ढों को ढकने के लिए लोहे की चादरें डाली गई थी, लेकिन तब से अब तक पुल की सुरक्षा के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
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पूर्व जिला पंचायत सदस्य डा. नरेंद्र डंगवाल, गोविंद बडोनी, धूम सिंह जखेडी, आनंद व्यास, धर्म सिंह बिष्ट, तेजराम सेमवाल, दिनेश लाल, भजन सिंह का कहना है कि पुल की स्थिति नाजुक बनी है। पुल कभी भी गिर सकता है। पुल के गड्ढों को ढकने के लिए उसके ऊपर से डाली गई लोहे की चादरें जंक लगने से सड़ गई है।
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कोट
बजट के अभाव में हनुमान मंदिर पुल का मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है। पुल की खस्ताहाल स्थिति को देखते हुए आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों से वार्ता कर उनको साइट दिखा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुल को खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं है।
-जगमोहन सिंह चौहान, प्रभारी ईई लोनिवि घनसाली