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जलवायु परिवर्तन की मार से फसलों को बचाने के लिए शोध शुरू
Updated Mon, 07 Aug 2017 10:36 PM IST
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चंबा (टिहरी)। अब जल्द ही जलवायु परिवर्तन की मार से फसलों को नुकसान से बचाना संभव हो सकेगा। इसके लिए रानीचौरी परिसर के मौसम विज्ञान ने प्रथम चरण में गेहूं और मंडुवा पर शोध शुरू कर दिया। इस दौरान वैज्ञानिक पौधे की बुआई से लेकर कटाई तक बारीकी से नजर रखकर रिपोर्ट तैयार करेंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को रिसर्च पेपर प्रस्तुत करने के बाद काश्तकारों को फसल उपज बढ़ाने की नई जानकारियां मिल सकेंगी।
मौसम में दिन प्रतिदिन आ रहे परिवर्तन के कारण फसलों में बीमारी, कम उत्पादन की समस्या आम बात हो गई है। इससे निपटने के लिए आईसीएआर ने रानीचौरी परिसर के मौसम विज्ञान विभाग को फसलों पर शोध करने की जिम्मेदारी सौंपी है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए विभाग ने गेहूं और मंडुवा की बुआई कर दी है। मौसम विज्ञान विभाग के तकनीकी अधिकारी प्रकाश नेगी ने बताया कि अनुसंधान करने के लिए दोनों फसलों के एक ही बीज को तीन अलग-अलग समय पर रानीचौरी परिसर के खेतों में बोया गया है। अब इनकी वैज्ञानिक निगरानी कर रहे हैं कि किस समय की फसल जल्दी ग्रोथ कर रही है। अधिक उपज जानने के लिए पौधे के दाने का वजन भी नापा जाएगा। इन सभी बातों को आईसीएआर को भेजा जाएगा। इसके आधार पर किसानों को नए फसल चक्र के आधार खेती करने की जानकारी दी जाएगी।
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मौसम में दिन प्रतिदिन आ रहे परिवर्तन के कारण फसलों में बीमारी, कम उत्पादन की समस्या आम बात हो गई है। इससे निपटने के लिए आईसीएआर ने रानीचौरी परिसर के मौसम विज्ञान विभाग को फसलों पर शोध करने की जिम्मेदारी सौंपी है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए विभाग ने गेहूं और मंडुवा की बुआई कर दी है। मौसम विज्ञान विभाग के तकनीकी अधिकारी प्रकाश नेगी ने बताया कि अनुसंधान करने के लिए दोनों फसलों के एक ही बीज को तीन अलग-अलग समय पर रानीचौरी परिसर के खेतों में बोया गया है। अब इनकी वैज्ञानिक निगरानी कर रहे हैं कि किस समय की फसल जल्दी ग्रोथ कर रही है। अधिक उपज जानने के लिए पौधे के दाने का वजन भी नापा जाएगा। इन सभी बातों को आईसीएआर को भेजा जाएगा। इसके आधार पर किसानों को नए फसल चक्र के आधार खेती करने की जानकारी दी जाएगी।
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