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आखिरकार एक साल बाद पूरा हुआ कैटवॉक का चुनौती पूर्ण काम
Updated Sun, 16 Jul 2017 10:18 PM IST
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नई टिहरी। प्रतापनगर के लिए बन रहे चांठी-डोबरा पुल के निर्माण में लोनिवि के लिए चुनौती बने कैटवॉक का निर्माण आखिरकार एक साल बाद पूरा हो गया है। वर्तमान में कैटवॉक के ऊपर फुली और फ्रेम बनाने का काम चल रहा है, जबकि 15 अगस्त से मुख्य पुल को जोड़ने के लिए रस्से खिंचने का काम शुरू होगा। सात-सात सौ मीटर के 24 रस्से खिंचने में करीब 80 दिन लगेंगे। इसके बाद मुख्य पुल के फ्रेबिकेशन शुरू होगा।
सहायक अभियंता एसएस मखलोगा का कहना है कि टिहरी बांध की झील के ऊपर 11 सालों से बन रहे चांठी-डोबरा पुल के निर्माण ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। एक साल से पुल के रस्सों को आरपार करवाने के लिए समुद्रतल 898 मीटर की ऊंचाई पर सात सौ कैटवॉक का निर्माण किया जा रहा था, लेकिन अधिक ऊंचाई से तेज हवाओं में श्रमिकों के रस्सों के सहारे लटककर कैटवॉक का काम करना चुनौती बना हुआ था। मुख्य पुल को जोड़ने के रस्से, गार्डर, प्लेटें समेत अन्य 15 सौ टन की लोहे की सामग्री पंजाब के रोपड़ भी जून में पहुंच गई थी।
अब नाबार्ड से मांगा बजट
केंद्र सरकार की ओर से पुल निर्माण को अपने हिस्से की 50 फीसदी धनराशि 74 करोड़ 95 लाख डेढ़ साल बाद भी न देने के चलते राज्य सरकार ने फिर से नाबार्ड से धनराशि की मांग की है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने नाबार्ड से 74 करोड़ 95 लाख लेकर पुल निर्माण को दे चुका है, जिसमें से करीब 70 करोड़ खर्च हो चुके हैं। केंद्र सरकार ने टीएचडीसी के माध्यम से धनराशि देनी थी, लेकिन नहीं मिलने पर राज्य सरकार ने नाबार्ड को डीपीआर भेजी है।
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सहायक अभियंता एसएस मखलोगा का कहना है कि टिहरी बांध की झील के ऊपर 11 सालों से बन रहे चांठी-डोबरा पुल के निर्माण ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। एक साल से पुल के रस्सों को आरपार करवाने के लिए समुद्रतल 898 मीटर की ऊंचाई पर सात सौ कैटवॉक का निर्माण किया जा रहा था, लेकिन अधिक ऊंचाई से तेज हवाओं में श्रमिकों के रस्सों के सहारे लटककर कैटवॉक का काम करना चुनौती बना हुआ था। मुख्य पुल को जोड़ने के रस्से, गार्डर, प्लेटें समेत अन्य 15 सौ टन की लोहे की सामग्री पंजाब के रोपड़ भी जून में पहुंच गई थी।
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अब नाबार्ड से मांगा बजट
केंद्र सरकार की ओर से पुल निर्माण को अपने हिस्से की 50 फीसदी धनराशि 74 करोड़ 95 लाख डेढ़ साल बाद भी न देने के चलते राज्य सरकार ने फिर से नाबार्ड से धनराशि की मांग की है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने नाबार्ड से 74 करोड़ 95 लाख लेकर पुल निर्माण को दे चुका है, जिसमें से करीब 70 करोड़ खर्च हो चुके हैं। केंद्र सरकार ने टीएचडीसी के माध्यम से धनराशि देनी थी, लेकिन नहीं मिलने पर राज्य सरकार ने नाबार्ड को डीपीआर भेजी है।
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