{"_id":"259be71b81ee726c58126868313547bc","slug":"state-government-and-sports-department-do-not-care-about-players","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपनों से मात खा रहे बाक्सिंग के ‘पितामह’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपनों से मात खा रहे बाक्सिंग के ‘पितामह’
अमर उजाला/अंशुल डांगी, देहरादून
Updated Fri, 18 Oct 2013 10:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने मुक्के का लोहा मनवाने वाले बॉक्सिंग चैंपियन पिथौरागढ़ के हरि सिंह थापा (बाक्सिंग के पितामह) उत्तराखंड में ही ‘मात’ खा रहे हैं। न तो राज्य सरकार इनकी सुध ले रही है और न ही खेल विभाग।
विज्ञापन
पिथौरागढ़ के नैनीसैनी गांव निवासी हरि सिंह थापा ने अपना सारा जीवन बाक्सिंग को समर्पित कर दिया। 1957 में फोर्ट विलियम्स कालेज (कोलकाता) में हुई राष्ट्रीय बाक्सिंग चैंपियनशिप के फाइनल में महज 30 सेकेंड में हरि सिंह थापा ने एन विकट को चित्त कर दिया था।
विज्ञापन
पढें, सचिन के मसूरी कनेक्शन से वाकिफ हैं आप?
विज्ञापन
अपनों के बीच ही गुमनामी का जीवन
1957 में ही उन्होंने देश को बाक्सिंग का पहला पदक दिलाया था। इसके बावजूद आज अपनों के बीच ही गुमनामी का जीवन जी रहे हरि सिंह थापा स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
इससे पहले 1947 में झांसी से जूनियर हाईस्कूल करने के बाद हरि सिंह सिग्नल ट्रेनिंग सेंटर की बॉय रेजीमेंट में भर्ती हो गए। रेजीमेंट के बॉक्सिंग कोच एफजी डीमैलो ने हरी सिंह के खेल को देखकर बॉक्सिंग के लिए तैयार किया।
पढें, खजाने की खोज में सैकड़ों लोग, मिला बहुत कुछ
देश को नामी बॉक्सर दिए
हरि सिंह के पुत्र चंद्र सिंह थापा ने बताया कि 1950 में बंगलौर में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में वे व्यक्तिगत चैंपियन बने और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में एक स्वर्ण और एक रजत पदक उन्होंने देश को दिलाया।
पढें, बंगाली क्यों पहुचंते हैं 19 किमी की चढ़ाई चढ़ रुद्रनाथ?
1958 में लंदन कॉमनवेल्थ गेम्स में मैच के दौरान पेट में चोट लगने से उनको बाहर होना पड़ा था, जिसके बाद 1961 में राष्ट्रीय कोच बनकर उन्होंने देश को नामी बॉक्सर दिए। वर्तमान में 81 साल की उम्र में भी हरि सिंह पिथौरागढ़ के बॉक्सरों को बॉक्सिंग का गुर सिखा रहे हैं।
ये हैं शिष्य
अर्जुन अवॉर्डी पदम बहादुर मल्ल, हवा सिंह, ओमप्रकाश भारद्वाज, एमके राय, एसके राय, एमएल विश्वकर्मा, डा. धर्मेंद्र भट्ट, भाष्कर भट्ट, राजेंद्र सिंह, जगजीवन सिंह, सीएल वर्मा, किशन सिंह, प्रकाश थापा, संतोष भट्ट, ललित नेगी, कल्याण सिंह, बलबीर चंद, योगेंद्र सिंह वल्दिया आदि।
पढें, 'गंगा' और 'हरकी पैड़ी' दोनों हैं ब्रिटिश की गुलाम!
बॉक्सिंग के महान खिलाड़ी
हरि सिंह थापा बॉक्सिंग के महान खिलाड़ी हैं। मुझे उनके साथ रहकर खेल की बारीकियां सीखने का मौका भी मिला। इस दौरान मैंने उनके साथ कुछ प्रतियोगिताओं में हिस्सा भी लिया था।
देश को पहला पदक दिलाने के बाद उन्होंने कोच के रूप में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए। खेद है कि बॉक्सिंग का यह महान खिलाड़ी आज अपने गांव में गुमनामी में जी रहा है। हमें उनका सम्मान करना चाहिए।
- पदम बहादुर मल्ल, अर्जुन अवॉर्डी