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SC, ST के नाम पर कहां खपाए 75 करोड़ रुपये!
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 05 Apr 2016 12:34 PM IST
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उत्तराखंड में अनुसूचित जातियों के लिए अवस्थापना सुविधाओं के विकास की योजना के नाम पर 75 करोड़ कहां खपा दिए गए? पता नहीं है।
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तत्कालीन सत्ताधारियों ने नियम-कानून को ठेंगे पर रखकर अपने चहेतों के क्षेत्रों में इस योजना के तहत कार्य और धन आवंटित करा दिया। अब जब उपयोगिता प्रमाणपत्र की बात आई तो अफसरों के हाथ-पैर फूल रहे हैं। नतीजा यह है कि अनुसूचित जाति, जनजाति की इस योजना का वित्त विभाग ने बजट रोक दिया है।
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मामला वर्ष 2014-15 का है। अनुसूचित जाति, जनजाति की अवस्थापना सुविधाओं के फंड को सत्ता के नजदीकियों ने ‘हाईजैक’ कर लिया। ऐन 31 मार्च 2014 को सत्ताधारी नेताओं ने अफसरों को अपने चहेतों के क्षेत्रों की सूची भेजी और कार्य फाइनल करा लिया। सत्ता की हनक की वजह से 75 करोड़ आवंटित करा लिए गए और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सूत्रों का कहना है कि जहां कार्य हुए हैं, वे अनुसूचित जाति, जनजाति से संबंधित क्षेत्र ही नहीं है।
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मामला उजागर होने पर अब उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं दिए जा रहे हैं। वित्त विभाग ने फिलहाल इस मद का पांच करोड़ रुपये बजट रोक दिया है। इस मामले में आरटीआई के तहत सूचना मांगने वालों की लंबी लाइन होने से अधिकारी घबरा रहे हैं। निदेशक समाज कल्याण वीएस धानिक ने बजट न मिलने की पुष्टि की है। वित्त सचिव अमित नेगी का कहना है कि जब कोई कमी होती है तभी बजट रुकता है।
यह है प्रक्रिया, जो पूरी नहीं की गई
अफसरों के मुताबिक प्रक्रिया यह है कि जिन क्षेत्रों में कार्य होने हैं वहां की सूची समाज कल्याण निदेशालय को भेजी जाती है, वहां तकनीकी सलाहकार सेल यह तय करता है कि संबंधित क्षेत्रों में इस योजना के तहत कार्य की जरूरत है। वे कार्य विभागीय पाइप लाइन में आ जाते हैं। इस मामले में इसके ठीक उलट अफसरों से कार्य करा लिया गया।