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दूसरों को बचाया, अपनों को नहीं ढूंढ पाया
शेषमणि शुक्ल
Updated Sat, 06 Jul 2013 09:15 AM IST
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फोर्स में फर्ज ही सब कुछ है। इसके आगे न कोई अपना है, न पराया। एयरफोर्स के पायलट एसके प्रधान ने इसे साबित कर दिखाया है। प्रधान केदारघाटी में फंसे लोगों के बीच अपने रिश्तेदारों को ढूंढने के बजाय अन्य यात्रियों को बचाने में जुटे रहे।
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अनुभवों को शायद ही भूल पाऊंगा
हेलीकाप्टर हादसे में अपने साथियों को खोने के बाद भी वे सब कुछ भुलाकर लोगों को सुरक्षित पहुंचाने में लगे रहे। केदारनाथ की तंग घाटियां काफी चुनौतीपूर्ण थीं। इसे अंजाम देने वाले एयरफोर्स के स्क्वाड्रन लीडर एसके प्रधान पहले पायलट थे जिन्होंने जंगलचट्टी जैसी मुश्किल जगह पर एमआई-17 हेलीकाप्टर उतारने का साहस किया। बताते हैं कि विपरीत मौसम में यात्रियों को निकालने के दौरान के अनुभवों को शायद ही भूल पाऊंगा।
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गुप्तकाशी के देवशाल हेलीपैड पर प्रधान मिले थे। बताते हैं जिस दिन पहली बार वे जंगलचट्टी उतरा, हर तरफ कोहराम था। जिधर नजर गई, शव पड़े थे। जो जीवित थे, जिंदगी से जद्दोजहद कर रहे थे। उन्हें जल्द वहां से निकालना था, कुछ और सोचने का मौका नहीं था।
शायद अब वे उन्हें नहीं मिल सकेंगे
सोते-जागते बस रेस्क्यू, उड़ाने, लोगों की चीख-पुकार ही दिख रहा था। एक दिन में कितनी उड़ानें भरीं इसकी भी गिनती भूल गए। बहनोई के माता-पिता भी केदारनाथ की यात्रा पर आए थे। जानकारी मिली लेकिन दूसरों को बचाने में लगे रहे। अब अपने रिश्तेदार शायद अब वे उन्हें नहीं मिल सकेंगे। लेकिन बचाए गए लोगों की आभार भरी नजरें जब याद आती हैं तो दिल का यह मलाल निकल जाता है।