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जज्बे को सलाम: दिन में ड्यूटी, रात में जन्मी बेटी
रुड़की/बसंत कुमार
Updated Sat, 01 Jun 2013 02:15 AM IST
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अफसरशाही पर अक्सर इल्जाम लगते हैं। इसके उलट, रुड़की की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सोनिका ने ऐसी मिसाल कायम की है जो अफसरों को काहिल और नाकारा बताने वालों के लिए करारा जवाब है ही, साथ ही अधिकारियों की बिरादरी के लिए भी प्रेरणादायक है।
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इस महिला आईएएस ने गर्भावस्था के आखिरी दिन तक काम किया। काम भी कोई हल्का-फुल्का नहीं, बल्कि तपती दोपहरी में घाड़ जैसे दुर्गम इलाके में अवैध खनन के खिलाफ छापामारी की अगुवाई और ढंडेरा में चल रहे आमरण अनशन के दौरान मौके पर जाकर आंदोलनकारियों को मनाना।
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बुधवार की रात को इस अफसर ने एक बेटी को जन्म दिया है। सोनिया इस वक्त देहरादून के सीएमआई अस्पताल में दाखिल हैं।
करीब नौ माह पहले रुड़की में आईएएस सोनिका की बतौर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट तैनाती हुई। इस दौरान उन्होंने अपने मातहतों पर एक गंभीर, जिम्मेदार और संवेदनशील अफसर की छाप छोड़ी है। गर्भवती होने के बावजूद भी लगातार रुड़की तहसील की जिम्मेदारी संभालती रहीं।
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आम घरेलू महिला को जिन दिनों में घर के बड़े-बूढ़े पूरी तरह आराम की नसीहत देते हैं, ऐसे दिनों में रुड़की की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट काम किए जा रही थीं।
यह भी हैरतअंगेज है कि उनकी देखभाल करने के लिए भी कोई उनके साथ नहीं रहा। सोनिका के पति धनंजय उपाध्याय दिल्ली स्थित डीआरडीओ जैसे महत्वपूर्ण महकमे में वैज्ञानिक हैं।
-मैडम में अद्भुत कार्यक्षमता है। उनकी कार्यशैली सभी मातहतों को साथ लेकर चलने की है। किसी भी काम को समय से निपटाने पर उनका सबसे ज्यादा जोर रहता है।
वीर सिंह बुधियाल, अपर उपजिलाधिकारी, रुड़की
-मैडम सभी कर्मचारियों के साथ सम्मान के साथ पेश आती हैं। इसीलिए उनके साथ काम करने में कोई दिक्कत नहीं होती। दो दिन पहले उन्होंने बांग्लादेश से आए प्रतिनिधिमंडल को रुड़की के प्रशासन की जानकारी इतनी बखूबी दी कि सभी उनके कायल हो गए।
दिनेश मोहन उनियाल (तहसीलदार, रुड़की)
-मेरी पत्नी रफ एंड टफ है। उसने व्यक्तिगत और प्रोफेशनल लाइफ दोनों में बहुत अच्छे से तालमेल बैठाया है। काम का बोझ था, उसने कह रखा था कि मैं छुट्टी नहीं लूंगी। उसके जज्बे की मैं कद्र करता हूं। जिस तरह से उसने आखिरी दिन तक प्रशासनिक काम किया मुझे बेहद फख्र है।
धनंजय, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सोनिका के पति