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भविष्य के लिए जल एक वैश्विक आवश्यकता : डॉ. प्रताप
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पंतनगर। भविष्य के लिए जल एक वैश्विक आवश्यकता है। इसका संरक्षण सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने कृषि क्षेत्र में जल संरक्षण एवं समग्र तकनीकी प्रयोगों से भूजल प्रबंधन विषय पर हुई कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि यह बात कही।
प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग सभागार में आईआईटी खड़गपुर, वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी आस्ट्रेलिया, एसवीपी एनआईटी सूरत, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्कोनसिंन मेडिसन यूएसए एवं क्यूसलेंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी आस्ट्रेलिया के सहयोग से संचालित स्पार्क परियोजना के तहत कार्यशाला हुई। कुलपति डॉ. प्रताप ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के भौगोलिक परिदृश्य के अनुरूप भविष्य की परियोजनाएं तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने आशा जताई कि कार्यक्रम में उपस्थित भारतीय एवं विदेशी सहयोगियों के प्रयासों से इस दिशा में वैश्विक सोच विकसित होगी।
प्रोफेसर बसंत माहेश्वरी एवं प्रोफेसर डीआर मेलापल्ली ने उत्तराखंड के साथ गुजरात एवं महाराष्ट्र में किए जा रहे शोध कार्यों के बारे में बताया। इससे पूर्व डा. जेपी पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। वहां पर परियोजना के सह-संयोजक प्रो. एचजे शिवा प्रसाद, सह प्राध्यापक डॉ. रवि सक्सेना, प्रो. राजेंद्र सिंह, डॉ. एस चक्रवर्ती, डॉ. जयंतीलाल, एन. पटेल और विभिन्न संस्थानों से 30 प्रतिभागी मौजूद रहे।
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प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग सभागार में आईआईटी खड़गपुर, वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी आस्ट्रेलिया, एसवीपी एनआईटी सूरत, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्कोनसिंन मेडिसन यूएसए एवं क्यूसलेंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी आस्ट्रेलिया के सहयोग से संचालित स्पार्क परियोजना के तहत कार्यशाला हुई। कुलपति डॉ. प्रताप ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के भौगोलिक परिदृश्य के अनुरूप भविष्य की परियोजनाएं तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने आशा जताई कि कार्यक्रम में उपस्थित भारतीय एवं विदेशी सहयोगियों के प्रयासों से इस दिशा में वैश्विक सोच विकसित होगी।
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प्रोफेसर बसंत माहेश्वरी एवं प्रोफेसर डीआर मेलापल्ली ने उत्तराखंड के साथ गुजरात एवं महाराष्ट्र में किए जा रहे शोध कार्यों के बारे में बताया। इससे पूर्व डा. जेपी पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। वहां पर परियोजना के सह-संयोजक प्रो. एचजे शिवा प्रसाद, सह प्राध्यापक डॉ. रवि सक्सेना, प्रो. राजेंद्र सिंह, डॉ. एस चक्रवर्ती, डॉ. जयंतीलाल, एन. पटेल और विभिन्न संस्थानों से 30 प्रतिभागी मौजूद रहे।
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