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वीरो-देवल में उत्साह का माहौल
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Tue, 06 Dec 2016 10:05 PM IST
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वीरो-देवल में 75 वर्ष बाद आयोजित हो रहे पांडव नृत्य
- फोटो : amar ujala.
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विकासखंड के ग्राम पंचायत वीरो-देवल में 75 वर्ष बाद आयोजित हो रहे पांडव नृत्य को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। 28 दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के लिए प्रवासी ग्रामीण व ध्याणियां भी पहुंच रही हैं।
गांव के पंचायती चौक में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के तहत पांडवानी गायन में ढोल-दमाऊं की थाप पर पांडव नृत्य कर रहे हैं। बीते दो दिन पांडव ने वीरों और देवल गांव का घर-घर जाकर भक्तों को आशीष दिया। बुधवार से अनुष्ठान में छाका (भोजन व्यवस्था) के तहत पांडव को प्रतिदिन अलग-अलग परिवार भोजन कराएंगे।
10 दिसंबर तक आयोजित इस परंपरा के उपरांत विशेष पूजा-अर्चना व अन्य अनुष्ठान संपादित किए जाएंगे। इसके बाद गैंडा कौथिक, मोरू डाली, चक्रव्यूह आदि लीलाओं का मंचन किया जाएगा।
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आयोजन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह गुसांई व ग्राम प्रधान मदन मोहन डिमरी ने बताया कि सात दशक बाद आयोजित हो रहे पांडव नृत्य में शामिल होने के लिए गांव के सभी प्रवासी परिवार व ध्याणियां अपनी सुविधा के हिसाब से शामिल हो रहे हैं। गांव में सभी घरों में रिश्तेदारों, सगे-संबंधियों व क्षेत्र के गांवों से पहुंच रहे मेहमानों के रहने व खाने की व्यवस्था की गई है।
उधर, क्षेत्र के बष्टी, नारी, गोदी-गिवाला, गीड और हरियाली-कांडा गांव में भी पांडव नृत्य को लेकर इन दिनों गांवों में रौनक लौट आई है। यहां वर्षो से बंद पड़े घरों के दरवाजे भी खुले नजर आ रहे हैं।
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गांव के पंचायती चौक में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के तहत पांडवानी गायन में ढोल-दमाऊं की थाप पर पांडव नृत्य कर रहे हैं। बीते दो दिन पांडव ने वीरों और देवल गांव का घर-घर जाकर भक्तों को आशीष दिया। बुधवार से अनुष्ठान में छाका (भोजन व्यवस्था) के तहत पांडव को प्रतिदिन अलग-अलग परिवार भोजन कराएंगे।
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10 दिसंबर तक आयोजित इस परंपरा के उपरांत विशेष पूजा-अर्चना व अन्य अनुष्ठान संपादित किए जाएंगे। इसके बाद गैंडा कौथिक, मोरू डाली, चक्रव्यूह आदि लीलाओं का मंचन किया जाएगा।
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आयोजन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह गुसांई व ग्राम प्रधान मदन मोहन डिमरी ने बताया कि सात दशक बाद आयोजित हो रहे पांडव नृत्य में शामिल होने के लिए गांव के सभी प्रवासी परिवार व ध्याणियां अपनी सुविधा के हिसाब से शामिल हो रहे हैं। गांव में सभी घरों में रिश्तेदारों, सगे-संबंधियों व क्षेत्र के गांवों से पहुंच रहे मेहमानों के रहने व खाने की व्यवस्था की गई है।
उधर, क्षेत्र के बष्टी, नारी, गोदी-गिवाला, गीड और हरियाली-कांडा गांव में भी पांडव नृत्य को लेकर इन दिनों गांवों में रौनक लौट आई है। यहां वर्षो से बंद पड़े घरों के दरवाजे भी खुले नजर आ रहे हैं।