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वासुदेव के जयकारों से गूंज उठा पुजार गांव
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
Updated Fri, 22 Apr 2016 10:30 PM IST
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वासुदेव पुजार गांव
- फोटो : amarujala
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21 वर्ष बाद पुजार गांव में जब भगवान वासुदेव की डोली मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकली तो पूरा क्षेत्र वासुदेव के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ देवता के दर्शन कर ध्याणियों और भक्तों ने मनौतियां मांगीं। 24 अप्रैल से श्री वासुदेव भगवान की दिवारा यात्रा शुरू होगी जो नौ माह तक चलेगी।
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जखोली ब्लाक की बांगर पट्टी के 16 गांवों के आराध्य देवता श्री वासुदेव भगवान के पुजार गांव स्थित प्राचीन मंदिर में शुक्रवार तड़के से पूजा शुरू हो गई थी। प्रात: आठ बजे सभी गांवों की सहमति से खलियाण गांव के शिव सिंह राणा को यज्ञपति चुना गया।
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इसके बाद शिव सिंह राणा ने प्रात: 9 बजे मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया और भगवान की डोली को बाहर लाए। 21 वर्ष बाद जैसे ही देवता की डोली मंदिर के गर्भगृह से बाहर परिसर में पहुंची तो पूरा क्षेत्र वासुदेव भगवान के जयकारों से गूंज उठा।
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इस मौके पर आराध्य की पूजा की गई। देव नृत्य में पश्वाओं ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। श्री भगवान वासुदेव मंदिर समिति के अध्यक्ष महावीर सिंह पंवार ने बताया कि 24 अप्रैल से शुरू हो रही दिवारा यात्रा में देवता की डोली पुजार से खलियाण गांव होते हुए मुन्याघर, पूलन, सिरवाड़ी, बधाणी, गेठाणा, धारकुड़ी सहित क्षेत्र के 16 गांवों का भ्रमण करेगी।
इन गांवों के प्रत्येक परिवार के घर-घर डोली जाकर भक्तों को आशीष देगी। इस मौके पर प्रमुख राजकुमारी रावत, विजेंद्र मिंगवाल, दौलत राम भट्ट, गंगाराम भट्ट, केदार सिंह, चिरंजीव प्रसाद, कुलेंद्र राणा, राजेश्वरी देवी, उमेद सिंह पंवार, कपूर सिंह रावत और सोहन सिंह पंवार आदि मौजूद थे।
12 वर्ष तक होता था भ्रमण
रुद्रप्रयाग। बांगर पट्टी के आराध्य देवता वासुदेव भगवान की दिवारा यात्रा पूर्व में प्रत्येक 12 वर्ष में होती थी। इस दौरान डोली 12 वर्ष तक क्षेत्र के 16 गांवों का भ्रमण करती थी। लोगों की व्यस्तता और सुविधाओं के अभाव में वर्ष 1995-96 के बाद अब 21 वर्ष के बाद दिवारा यात्रा हो रही है, जो 9 माह की होगी।