{"_id":"61e059fd5cb2e90162534020","slug":"upheaval-in-bjp-in-kedarnath-constituency-due-to-elections-rudrapryag-news-drn401571340","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनाव को लेकर केदारनाथ विस क्षेत्र में भाजपा में उथल-पुथल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनाव को लेकर केदारनाथ विस क्षेत्र में भाजपा में उथल-पुथल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगामी विस चुनाव को लेकर केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा में उथल-पुथल मची है। कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत के यहां से चुनाव लड़ने की अटकलों के बीच विरोध के स्वर जोर पकड़ने लगे हैं। कार्यकर्ताओं ने हाईकमान से वर्षों से संगठन से जुड़े स्थानीय व संभावितों में से प्रत्याशी के चयन की मांग की है। भाजपा के सामने कांग्रेस से सीट छीनने के साथ ही अपनी साख बचाने की चुनौती भी है।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद केदारनाथ विधानसभा सीट से 2002 व 2007 में भाजपा ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 2012 व 2017 में उसे हार का सामना करना पड़ा। बीते चुनाव में यहां पार्टी को चौथे स्थान पर रहकर संतोष करना पड़ा। इस बार भी पार्टी से 11 संभावितों ने अपनी दावेदारी पेश की है, जिसमें अजेंद्र अजय को सरकार ने बीकेटीसी का अध्यक्ष बना दिया है, लेकिन अब भी मैदान में हैं। साथ ही दो पूर्व विधायक सहित कई पदाधिकारी व संगठन से जुड़े लोग भी हैं। अजेंद्र अजय का कहना है कि प्रत्याशी का चयन संभावितों में से होना चाहिए। दूसरी तरफ कुछ दिनों से कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत के केदारनाथ सीट से चुनाव लड़ने की अटकलों ने सभी की पेशानियों पर बल ला दिया है। पार्टी से जुड़े त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर संगठन से जुड़े पदाधिकारियों व सदस्यों का कहना है कि बाहरी का खुलकर विरोध किया जाएगा। प्रदेश व राष्ट्रीय हाईकमान को सभी पहलुओं के बारे में सोच-विचारकर टिकट वितरण करना चाहिए। बता दें कि कुछ दिन पूर्व पुरुषोत्तम गुलेरिया की मौजूदगी में हुई बैठक में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने हाईकमान से बाहरी जिले से किसी को प्रत्याशी न बनाने की मांग की थी।
विज्ञापन
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद केदारनाथ विधानसभा सीट से 2002 व 2007 में भाजपा ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 2012 व 2017 में उसे हार का सामना करना पड़ा। बीते चुनाव में यहां पार्टी को चौथे स्थान पर रहकर संतोष करना पड़ा। इस बार भी पार्टी से 11 संभावितों ने अपनी दावेदारी पेश की है, जिसमें अजेंद्र अजय को सरकार ने बीकेटीसी का अध्यक्ष बना दिया है, लेकिन अब भी मैदान में हैं। साथ ही दो पूर्व विधायक सहित कई पदाधिकारी व संगठन से जुड़े लोग भी हैं। अजेंद्र अजय का कहना है कि प्रत्याशी का चयन संभावितों में से होना चाहिए। दूसरी तरफ कुछ दिनों से कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत के केदारनाथ सीट से चुनाव लड़ने की अटकलों ने सभी की पेशानियों पर बल ला दिया है। पार्टी से जुड़े त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर संगठन से जुड़े पदाधिकारियों व सदस्यों का कहना है कि बाहरी का खुलकर विरोध किया जाएगा। प्रदेश व राष्ट्रीय हाईकमान को सभी पहलुओं के बारे में सोच-विचारकर टिकट वितरण करना चाहिए। बता दें कि कुछ दिन पूर्व पुरुषोत्तम गुलेरिया की मौजूदगी में हुई बैठक में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने हाईकमान से बाहरी जिले से किसी को प्रत्याशी न बनाने की मांग की थी।
विज्ञापन