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मार्कण्डेय मंदिर मक्कूमठ में विराजे तृतीय केदार
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तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल मार्कण्डेय मंदिर मक्कूमठ पहुंचने पर भक?
- फोटो : RUDRAPRYAG
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तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ छह माह की शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए शीतकालीन गद्दीस्थल मार्कण्डेय मंदिर मक्कूमठ में विराजमान हो गए हैं। भोग मूर्तियों को धार्मिक परंपराओं व वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने आराध्य तृतीय केदार की पूजा-अर्चना व दर्शन कर उत्तराखंड राज्य की सुख-समृद्धि की मनौति भी मांगी।
सोमवार को भगवान तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली दोपहर 12.30 बजे मार्कण्डेय मंदिर में पहुंची। इस मौके पर पूरा क्षेत्र आराध्य बाबा तुंगनाथ के जयकारों से गूंज उठा। मुख्य मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद तृतीय केदार की चल विग्रह उत्सव डोली भूतनाथ मंदिर में पहुंच। मंदिर में दर्शन के बाद डोली सभा मंडप में विराजमान हुई। इस मौके पर ग्रामीणों ने अपने आराध्य भगवान तुंगनाथ को सामूहिक अर्घ्य लगाया। साथ ही मक्कू के हक-हकूकधारी पंच पुजारियों ने मठाधिपति राम प्रसाद मैठाणी के हाथों विशेष पूजा-अर्चना व दान की परंपरा का निर्वहन किया। इसके उपरांत, भगवान तुंगनाथ की भोग मूर्तियों को शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए मार्कण्डेय मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया गया। इससे पूर्व सुबह 10 बजे तृतीय केदार की चल विग्रह डोली ने भनकुन से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए प्रस्थान किया। गुज्जर ग्वाड़ में ग्रामीणों ने भगवान को सामूहिक अर्घ्य लगाया। यहां से आकाशकामनी नदी में स्नान के बाद पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर चल विग्रह उत्सह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंची।
इस मौके पर विधायक मनोज रावत, पूर्व विधायक आशा नौटियाल, केदारनाथ के पुजारी शिव शंकर लिंग, डोली प्रभारी प्रकाश पुरोहित, प्रबंधक बलवीर नेगी, चोपता व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र, खुशाल सिंह नेगी, पुजारी विनोद मैठाणी, अतुल मैठाणी, केवलानंद मैठाणी, चंद्रबल्लभ मैठाणी, सुरेंद्र मैठाणी, उमादत्त मैठाणी, पुष्कर सिंह रावत, ग्राम प्रधान विजयपाल सिंह नेगी, अरविंद रावत, क्षेपं सदस्य जयवीर नेगी सहित तुंगनाथ घाटी के ग्रामीण मौजूद थे।
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सोमवार को भगवान तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली दोपहर 12.30 बजे मार्कण्डेय मंदिर में पहुंची। इस मौके पर पूरा क्षेत्र आराध्य बाबा तुंगनाथ के जयकारों से गूंज उठा। मुख्य मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद तृतीय केदार की चल विग्रह उत्सव डोली भूतनाथ मंदिर में पहुंच। मंदिर में दर्शन के बाद डोली सभा मंडप में विराजमान हुई। इस मौके पर ग्रामीणों ने अपने आराध्य भगवान तुंगनाथ को सामूहिक अर्घ्य लगाया। साथ ही मक्कू के हक-हकूकधारी पंच पुजारियों ने मठाधिपति राम प्रसाद मैठाणी के हाथों विशेष पूजा-अर्चना व दान की परंपरा का निर्वहन किया। इसके उपरांत, भगवान तुंगनाथ की भोग मूर्तियों को शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए मार्कण्डेय मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया गया। इससे पूर्व सुबह 10 बजे तृतीय केदार की चल विग्रह डोली ने भनकुन से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए प्रस्थान किया। गुज्जर ग्वाड़ में ग्रामीणों ने भगवान को सामूहिक अर्घ्य लगाया। यहां से आकाशकामनी नदी में स्नान के बाद पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर चल विग्रह उत्सह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंची।
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इस मौके पर विधायक मनोज रावत, पूर्व विधायक आशा नौटियाल, केदारनाथ के पुजारी शिव शंकर लिंग, डोली प्रभारी प्रकाश पुरोहित, प्रबंधक बलवीर नेगी, चोपता व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र, खुशाल सिंह नेगी, पुजारी विनोद मैठाणी, अतुल मैठाणी, केवलानंद मैठाणी, चंद्रबल्लभ मैठाणी, सुरेंद्र मैठाणी, उमादत्त मैठाणी, पुष्कर सिंह रावत, ग्राम प्रधान विजयपाल सिंह नेगी, अरविंद रावत, क्षेपं सदस्य जयवीर नेगी सहित तुंगनाथ घाटी के ग्रामीण मौजूद थे।
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