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Rudraprayag News: करोड़ों के घाटों पर लगे हैं रेत, बजरी, पत्थरों के ढेर

Tue, 06 Feb 2024 07:53 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 06 Feb 2024 07:53 PM IST
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There are piles of sand, gravel and stones on the ghats worth crores.
प्रशासन नहीं दे रहा है ध्यान, साफ-सफाई की नहीं हो रही है कोई व्यवस्था
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रुद्रप्रयाग। प्रशासन और नगर पालिका के संयुक्त प्रयास से रुद्रप्रयाग की दीवारों को रंग-बिरंगे चित्रों से खूबसूरत बनाया जा रहा है, लेकिन नमामि गंगे परियोजना के तहत निर्मित करोड़ों का घाट रेत, बजरी और पत्थरों के ढेर लगे हैं।

योग, ध्यान और तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए 2017-18 में 1639.12 लाख की लागत से अलकनंदा नदी किनारे व संगम के समीप घाट बनाए गए थे। कार्यदायी संस्था वेबकोस ने बिना बुनियाद और सुरक्षा इंतजाम के नदी तल से ही घाट बना थे, लेकिन निर्माण के बाद से ही इन घाटों का बेहतर उपयोग नहीं हो पाया है। निर्माण के कुछ ही दिन बाद ही घाट बदहाल होने लग गए थे। घाटों पर लगाई गई सोलर स्ट्रीट लाइट में से अधिकांश चोरी हो गई हैं।
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सीडीओ ने पहले ही निर्माण पर उठाए थे सवाल



2018-19 में तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी नंदन सिंह रावत ने नमामि गंगे परियोजना के तहत नगर क्षेत्र में निर्मित घाटों के निर्माण पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि कार्यदायी संस्था ने स्ट्रीट लाइट व टाइल्स की खरीद सामान्य दरों की अपेक्षा कई दरों पर की थी। साथ ही घाटों के निर्माण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने यह रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी थी, लेकिन मामला फाइलों तक ही सिमटकर रह गया। निवर्तमान सभासद सुरेंद्र सिंह रावत का कहना है कि घाट रेत-बजरी को रोकने तक सीमित हैं। शासन-प्रशासन की लचर कार्यशैली के कारण घाट नगर की खूबसूरती को भी लील रहे हैं। घाटों की साफ-सफाई कौन करेगा, इसे लेकर भी बीते पांच वर्षों में कोई व्यवस्था नहीं बन सकी है।
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बीते वर्ष जिला प्रशासन ने कहा था कि घाटों की साफ-सफाई के लिए बजट जारी करेंगे। स्वयं के स्तर से सभी घाटों की साफ-सफाई की गई, जिस पर नौ लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिल सका है।

-सुशील कुमार कुरील, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका रुद्रप्रयाग
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