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Rudraprayag News: मां गौरी माई मंदिर के कपाट भी खुले
Sat, 13 Apr 2024 05:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Sat, 13 Apr 2024 05:31 PM IST
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फोटो
अब छह माह तक गौरीकुंड में ही होंगे आराध्य के दर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुप्तकाशी। बैसाखी पर्व पर गौरीकुंड में आराध्य गौरी माई मंदिर के कपाट पूजा-अर्चना के साथ भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। इस मौके पर पूरा क्षेत्र मां गौरी माई के जयकारों से गूंज उठा। अब छह माह तक आराध्य मां भगवती की पूजा-अर्चना गौरीकुंड में ही होगी।
शनिवार को बैसाखी पर्व पर सुबह 6 बजे से गौरी गांव में मां गौरी माई की विशेष पूजा की गई। इसके बाद सुबह 7.00 बजे मां गौरी माई की मूर्ति को कंडी में विराजमान किया गया। साथ ही कलेऊ, मौसमी फल-फूल और चुनरी भेंट की गई। ढोल-दमाऊं और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ मां गौरी माई ने गौरी गांव से प्रस्थान किया। इस दौरान गांव की बुजुर्ग महिलाएं भावुक हो गई और काफी दूर तक देवी को विदा करने पहुंचीं। लगभग एक किमी की दूरी तय कर सुबह 8 बजे गौरी माई गौरीकुंड बाजार में पहुंची। लोगों ने पुष्प व अक्षत के साथ अपनी आराध्य का स्वागत किया। यहां से मां गौरी माई अपने मंदिर पहुंची और तीन परिक्रमा की। पुजारियों व हकल-हकूकधारियों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना के साथ सुबह 8.30 बजे गौरी माई मंदिर के कपाट खोल दिए गए। इस मौके पर मठाधिपति संपूर्णानंद गोस्वामी, पुजारी विजयराम गोस्वामी, मंदिर के प्रबंधक कैलाश बगवाड़ी, सरपंच विष्णुदत्त गोस्वामी, ग्राम प्रधान सोनी गोस्वामी सहित अन्य ग्रामीण व श्रद्धालु मौजूद थे।
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अब छह माह तक गौरीकुंड में ही होंगे आराध्य के दर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुप्तकाशी। बैसाखी पर्व पर गौरीकुंड में आराध्य गौरी माई मंदिर के कपाट पूजा-अर्चना के साथ भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। इस मौके पर पूरा क्षेत्र मां गौरी माई के जयकारों से गूंज उठा। अब छह माह तक आराध्य मां भगवती की पूजा-अर्चना गौरीकुंड में ही होगी।
शनिवार को बैसाखी पर्व पर सुबह 6 बजे से गौरी गांव में मां गौरी माई की विशेष पूजा की गई। इसके बाद सुबह 7.00 बजे मां गौरी माई की मूर्ति को कंडी में विराजमान किया गया। साथ ही कलेऊ, मौसमी फल-फूल और चुनरी भेंट की गई। ढोल-दमाऊं और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ मां गौरी माई ने गौरी गांव से प्रस्थान किया। इस दौरान गांव की बुजुर्ग महिलाएं भावुक हो गई और काफी दूर तक देवी को विदा करने पहुंचीं। लगभग एक किमी की दूरी तय कर सुबह 8 बजे गौरी माई गौरीकुंड बाजार में पहुंची। लोगों ने पुष्प व अक्षत के साथ अपनी आराध्य का स्वागत किया। यहां से मां गौरी माई अपने मंदिर पहुंची और तीन परिक्रमा की। पुजारियों व हकल-हकूकधारियों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना के साथ सुबह 8.30 बजे गौरी माई मंदिर के कपाट खोल दिए गए। इस मौके पर मठाधिपति संपूर्णानंद गोस्वामी, पुजारी विजयराम गोस्वामी, मंदिर के प्रबंधक कैलाश बगवाड़ी, सरपंच विष्णुदत्त गोस्वामी, ग्राम प्रधान सोनी गोस्वामी सहित अन्य ग्रामीण व श्रद्धालु मौजूद थे।
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