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Rudraprayag News: शिव धनुष किया भंग, लक्ष्मण-परशुराम संवाद को सराहा
Mon, 26 Oct 2026 06:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Mon, 26 Oct 2026 06:36 PM IST
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फोटो-- -- -
अगस्त्यमुनि। अगस्त्य रामलीला समिति की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला के तीसरे दिन अहिल्या उद्धार, सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग और राम-सीता विवाह की लीलाओं मंचन किया गया। लीला में लक्ष्मण-परशुराम और श्रीराम-परशुराम संवाद को खूब सराहा गया।
रामलीला का शुभारंभ अहिल्या उद्धार की लीला से हुआ। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण के राजा जनक के निमंत्रण पर मिथिला पहुंचने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। सीता स्वयंवर में जब कोई भी राजा शिव धनुष नहीं उठा सका तब महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम ने धनुष भंग कर दिया। इसके बाद राम-सीता विवाह का विवाह हुआ। मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चौहान ने कहा कि रामलीला भवनों के बुनियादी ढांचे में बदलाव कर उन्हें आधुनिक स्वरूप देना जरूरी है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि आचार्य अनिल बेंजवाल, समिति अध्यक्ष कमलेश जमलोकी, अखिलेश गोस्वामी, नवीन बिष्ट, विपिन रावत और जितेंद्र रावत मौजूद रहे। मंच संचालन गंगाराम सकलानी ने किया। संवाद
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अगस्त्यमुनि। अगस्त्य रामलीला समिति की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला के तीसरे दिन अहिल्या उद्धार, सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग और राम-सीता विवाह की लीलाओं मंचन किया गया। लीला में लक्ष्मण-परशुराम और श्रीराम-परशुराम संवाद को खूब सराहा गया।
रामलीला का शुभारंभ अहिल्या उद्धार की लीला से हुआ। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण के राजा जनक के निमंत्रण पर मिथिला पहुंचने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। सीता स्वयंवर में जब कोई भी राजा शिव धनुष नहीं उठा सका तब महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम ने धनुष भंग कर दिया। इसके बाद राम-सीता विवाह का विवाह हुआ। मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चौहान ने कहा कि रामलीला भवनों के बुनियादी ढांचे में बदलाव कर उन्हें आधुनिक स्वरूप देना जरूरी है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि आचार्य अनिल बेंजवाल, समिति अध्यक्ष कमलेश जमलोकी, अखिलेश गोस्वामी, नवीन बिष्ट, विपिन रावत और जितेंद्र रावत मौजूद रहे। मंच संचालन गंगाराम सकलानी ने किया। संवाद
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