{"_id":"673f693bbe2fe75cde0ffc39","slug":"signature-bridge-work-stalled-for-four-months-future-stuck-on-central-governments-report-rudraprayag-news-c-5-1-drn1019-553204-2024-11-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिग्नेचर पुल: चार माह से काम ठप, केंद्र सरकार की रिपोर्ट पर अटका भविष्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिग्नेचर पुल: चार माह से काम ठप, केंद्र सरकार की रिपोर्ट पर अटका भविष्य
Thu, 21 Nov 2024 10:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Thu, 21 Nov 2024 10:39 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
रुद्रप्रयाग। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत नरकोटा में प्रस्तवित सिग्नेचर पुल का काम चार माह से ठप पड़ा है। जुलाई माह में पुल के एक पिलर पर निर्मित अस्थायी ढांचा ध्वस्त हो गया था। अब, केंद्र सरकार के सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की टीम की सर्वेक्षण रिपोर्ट पर इस पुल का भविष्य अटका हुआ है। स्वीकृति के बाद से पुल पर विवादों का साया बना हुआ है। पुल निर्माण की सामग्री जगह-जगह रखी गई है, जिससे यातायात भी प्रभावित हो रहा है।
वर्ष 2017-18 में केंद्र सरकार की ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग का चौड़ीकरण कार्य शुरू हो गया था। राजमार्ग पर तीखे मोड़ों को खत्म करने के लिए कई जगहों पर पुल प्रस्तावित किए गए थे। इनमें अधिकांश का निर्माण पूरा हो चुका है, पर नरकोटा में 110 मीटर स्पान का 64 करोड़ की लागत से बनने वाला सिग्नेचर पुल कब पूरा होगा, किसी को पता नहीं है।
नरकोटा गदेरे पर पुल के निर्माण के लिए पहले श्रीनगर की तरफ वाले पिलर को लेकर भूमि विवाद आड़े आया। जैसे-तैसे विवाद निपटा तो पिलर की कई बार डिजाइन बदली गई। जून 2022 में काम शुरू हुआ, पर एक माह में ही शटरिंग ढह गई। इस हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए। इसके बाद छह माह तक कार्य पूरी तरह से ठप रहा। साथ ही शासन व विभागीय स्तर पर तत्कालीन ईई को निलंबित कर देहरादून अटैच कर दिया गया। जनवरी 2023 में पुन: सॉयल टेस्टिंग और डिजाइन में बदलाव के बाद पिलर निर्माण का कार्य शुरू किया गया।
विज्ञापन
कार्यदायी संस्था आरसीसी द्वारा सितंबर 2024 तक सिग्नेचर पुल को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया। तय समय के हिसाब से पुल का कार्य जोरों पर चल रहा था। इस वर्ष मार्च से निर्माण सामग्री मौके पर पहुंचाई जाने लगी थी। यहां लगभग एक किमी क्षेत्र में पुल निर्माण सामग्री रखी गई है, जिससे यातायात भी बाधित हो रहा है। इधर, बीते जून माह में दोनों पिलर पर लोहे के फ्रेम का अस्थायी टॉवर बनाकर पुल जोड़ने का काम शुरू किया गया। लेकिन 18 जुलाई को रुद्रप्रयाग की तरफ वाले पिलर का अस्थायी फ्रेम ढह गया, जिससे पुल निर्माण की उम्मीद फिर से धराशायी हो गई। अब, चार माह बीत चुके हैं, पर पुल का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अभी तक चार जांच दल मौके का निरीक्षण कर चुके है, जिसमें सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की तीन सदस्यीय टीम भी शामिल है। इस टीम की रिपोर्ट पर पुल का भविष्य अटका हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिग्नेचर पुल के दोनों पिलर वाले क्षेत्रों में हाईवे बदहाल हो गया है, जिससे वाहन हिचकोले खाकर निकल रहे हैं और राहगीरों को दिक्कत हो रही है। यही नहीं, पुल निर्माण में उपयोग होने वाले लोहे के बड़े-बड़े गार्डर व अन्य सामग्री सड़क के किनारों पर रखी गई है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना है।
इनका कहना है--
बदरीनाथ हाईवे पर नरकोटा में प्रस्तावित सिग्नेचर पुल निर्माण को लेकर भारत सरकार के सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की टीम को रिपोर्ट देनी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुल का आगे का कार्य निर्भर करता है। - नवनीत पांडे, अधिशासी अभियंता, एनएच निर्माण खंड, लोनिवि श्रीनगर गढ़वाल
वर्ष 2017-18 में केंद्र सरकार की ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग का चौड़ीकरण कार्य शुरू हो गया था। राजमार्ग पर तीखे मोड़ों को खत्म करने के लिए कई जगहों पर पुल प्रस्तावित किए गए थे। इनमें अधिकांश का निर्माण पूरा हो चुका है, पर नरकोटा में 110 मीटर स्पान का 64 करोड़ की लागत से बनने वाला सिग्नेचर पुल कब पूरा होगा, किसी को पता नहीं है।
विज्ञापन
नरकोटा गदेरे पर पुल के निर्माण के लिए पहले श्रीनगर की तरफ वाले पिलर को लेकर भूमि विवाद आड़े आया। जैसे-तैसे विवाद निपटा तो पिलर की कई बार डिजाइन बदली गई। जून 2022 में काम शुरू हुआ, पर एक माह में ही शटरिंग ढह गई। इस हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए। इसके बाद छह माह तक कार्य पूरी तरह से ठप रहा। साथ ही शासन व विभागीय स्तर पर तत्कालीन ईई को निलंबित कर देहरादून अटैच कर दिया गया। जनवरी 2023 में पुन: सॉयल टेस्टिंग और डिजाइन में बदलाव के बाद पिलर निर्माण का कार्य शुरू किया गया।
विज्ञापन
कार्यदायी संस्था आरसीसी द्वारा सितंबर 2024 तक सिग्नेचर पुल को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया। तय समय के हिसाब से पुल का कार्य जोरों पर चल रहा था। इस वर्ष मार्च से निर्माण सामग्री मौके पर पहुंचाई जाने लगी थी। यहां लगभग एक किमी क्षेत्र में पुल निर्माण सामग्री रखी गई है, जिससे यातायात भी बाधित हो रहा है। इधर, बीते जून माह में दोनों पिलर पर लोहे के फ्रेम का अस्थायी टॉवर बनाकर पुल जोड़ने का काम शुरू किया गया। लेकिन 18 जुलाई को रुद्रप्रयाग की तरफ वाले पिलर का अस्थायी फ्रेम ढह गया, जिससे पुल निर्माण की उम्मीद फिर से धराशायी हो गई। अब, चार माह बीत चुके हैं, पर पुल का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अभी तक चार जांच दल मौके का निरीक्षण कर चुके है, जिसमें सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की तीन सदस्यीय टीम भी शामिल है। इस टीम की रिपोर्ट पर पुल का भविष्य अटका हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिग्नेचर पुल के दोनों पिलर वाले क्षेत्रों में हाईवे बदहाल हो गया है, जिससे वाहन हिचकोले खाकर निकल रहे हैं और राहगीरों को दिक्कत हो रही है। यही नहीं, पुल निर्माण में उपयोग होने वाले लोहे के बड़े-बड़े गार्डर व अन्य सामग्री सड़क के किनारों पर रखी गई है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना है।
इनका कहना है
बदरीनाथ हाईवे पर नरकोटा में प्रस्तावित सिग्नेचर पुल निर्माण को लेकर भारत सरकार के सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की टीम को रिपोर्ट देनी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुल का आगे का कार्य निर्भर करता है। - नवनीत पांडे, अधिशासी अभियंता, एनएच निर्माण खंड, लोनिवि श्रीनगर गढ़वाल