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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rudraprayag News ›   Seek the cooperation of villagers in forest fire prevention

दावानल रोकने में ग्रामीणों का मांगेंगे सहयोग

Fri, 18 Mar 2016 09:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Fri, 18 Mar 2016 09:48 PM IST
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आग से जंगलों को बचाने में मदद करने वाले ग्राम व वन पंचायतों को वन विभाग सम्मानित करेगा। इन गांवों को विभागीय योजनाओं का भी लाभ दिया जाएगा। इससे जहां वनों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी, वहीं वन संपदा बढ़ने के साथ वन्य जीवों का बस्ती के तरफ रुख भी कम होगा।

दिसंबर से बरसाती सीजन शुरू होने तक उत्तराखंड में आग से धधकते जंगल और उठता धुएं का गुबार आम बात हो गई है। इससे प्रतिवर्ष करोड़ों की वन संपदा के साथ कई वन्य जीव भी आग की भेंट चढ़ जाते हैं। इसे देखते हुए वन विभाग ने वनों को आग से बचाने के लिए कार्य योजना तैयार की है। विभाग पर्यावरणविदों और गांवों में गठित वनाग्नि सुरक्षा समितियों के माध्यम से ग्रामीणों को वनों को आग से बचाने के लिए प्रेरित करेगा। जिस गांव या ग्राम पंचायत में फायर सीजन में जंगल आग से सुरक्षित रहेंगे उन्हें कॉरपोरेट सोशल रिस्पोंसबिलेटी (सीएसआर) के तहत नगद राशि के साथ ही प्रशस्तिपत्र से सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही इन गांवों में विभिन्न प्रजाति के पौधे उपलब्ध कराना, वनीकरण, नर्सरी आदि योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा।
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ये गांव भी होंगे सम्मानित
जिन गांवों में पांच या उससे अधिक वर्षों में वनाग्नि की घटना नहीं हुई और वहां वन क्षेत्र को नुकसान नहीं पहुंचा है, उन्हें भी वन विभाग सम्मानित करेगा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से अन्य गांव भी वनों की सुरक्षा को आगे आएंगे।
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10 हेक्टयर से अधिक जंगल हो चुके खाक
जनपद रुद्रप्रयाग में वन विभाग के अधीन केदारघाटी से लेकर धनपुर क्षेत्र में पिछले दिसंबर से फरवरी प्रथम सप्ताह तक वनाग्नि से 8 हेक्टयर से अधिक वन क्षेत्र जलकर राख हो चुका है। कई क्षेत्रों में भी बीते महीनों में दो से तीन बार आग लगी।

दो किशोरियों की हो चुकी मौत
इस वर्ष वनाग्नि की चपेट में आने से जिले के धनपुर पट्टी के पीड़ा गांव की दो किशोरियों की मौत हो चुकी है। पांच  फरवरी को तीन किशोरियां जंगल में लगी आग के बीच में घिर गई थी। बादा में उपचार के दौरान दो की देहरादून में अलग-अलग अस्पतालों में मौत हो गई थी। जिले में चार वर्ष पहले भी वनाग्नि से एक महिला की मौत हुई थी।

वनों को आग से बचाने के लिए ग्रामीणों का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसे में विभाग उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित करता है, तो वे वनों की सुरक्षा के लिए और अधिक सजग होंगे।- जगत सिंह जंगली, पर्यावरणविद् रुद्रप्रयाग

वनाग्नि से वनों को बचाने और घटनाओं से कम से कम नुकसान के लिए योजना तैयार की जा रही है, जिसमें ग्रामीणों को शामिल किया जा रहा है। विभाग को मिलने वाली विशेष मदों के माध्यम से उन गांवों को सम्मानित किया जाएगा जो फायर से वनों को बचाएंगे।- राजीव धीमान, डीएफओ रुद्रप्रयाग

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