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Rudraprayag News: केदारनाथ में प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से हो रहा निस्तारण
Wed, 29 Apr 2026 06:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Wed, 29 Apr 2026 06:43 PM IST
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अब तक 500 किलो सूखे कचरे से तैयार की जा चुकी हैं बेल्स
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए जिला प्रशासन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर कार्य कर रहा है। इसके लिए यात्रा मार्ग पर व केदारनाथ क्षेत्र में प्लास्टिक व सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। अभी तक 500 किलो सूखे कचरे से बेल (गट्ठर) तैयार की जा चुकी हैं।
नगर पंचायत केदारनाथ की ओर से सूखे वेस्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक बेलिंग मशीन का उपयोग किया जा रहा है। इस मशीन से प्लास्टिक और अन्य सूखे कचरे को दबाकर बेल्स के रूप में तैयार किया जा रहा है। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती ने बताया कि केदारनाथ में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर स्थापित किया गया है। यह केंद्र हीलिंग हिमालयन फाउंडेशन के सहयोग से शुरू किया गया था, जहां सूखे कचरे का संग्रहण, पृथक्करण और प्रोसेसिंग की जा रही है।अब तक करीब 500 किलोग्राम सूखे कचरे को प्रोसेस कर बेल (गट्ठर) तैयार की जा चुकी हैं। इनके विक्रय से नगर पंचायत को लगभग 15 से 20 हजार रुपये की आय होगी है। कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए इसे 15 अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए जिला प्रशासन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर कार्य कर रहा है। इसके लिए यात्रा मार्ग पर व केदारनाथ क्षेत्र में प्लास्टिक व सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। अभी तक 500 किलो सूखे कचरे से बेल (गट्ठर) तैयार की जा चुकी हैं।
नगर पंचायत केदारनाथ की ओर से सूखे वेस्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक बेलिंग मशीन का उपयोग किया जा रहा है। इस मशीन से प्लास्टिक और अन्य सूखे कचरे को दबाकर बेल्स के रूप में तैयार किया जा रहा है। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती ने बताया कि केदारनाथ में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर स्थापित किया गया है। यह केंद्र हीलिंग हिमालयन फाउंडेशन के सहयोग से शुरू किया गया था, जहां सूखे कचरे का संग्रहण, पृथक्करण और प्रोसेसिंग की जा रही है।अब तक करीब 500 किलोग्राम सूखे कचरे को प्रोसेस कर बेल (गट्ठर) तैयार की जा चुकी हैं। इनके विक्रय से नगर पंचायत को लगभग 15 से 20 हजार रुपये की आय होगी है। कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए इसे 15 अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
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