पदोन्नति में आरक्षण बहाल करने समेत सात सूत्री मांगों को लेकर उत्तराखंड एससी-एसटी इंपलाइज फेडरेशन ने कलक्ट्रेट में धरना दिया। उन्होंने कहा कि अगर मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह आंदोलन तेज करेंगे। इस अवसर पर जिला प्रशासन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया।
फेडरेशन के अध्यक्ष विजय बैरवाण की अध्यक्षता में हुए धरना प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि सरकार एससी-एसटी कर्मियों की वर्षों पुरानी लंबित मांगों पर मौन साधे हुए हैं। बीते 3 फरवरी को देहरादून में रैली के बाद भी शासन स्तर पर मांगों को लेकर कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन अब, अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने एक सुर में एससी-एसटी ओबीसी का प्रतिनिधित्व पूर्ण नहीं होने की स्थिति में कानून बनाकर प्रमोशन में आरक्षण बहाल करने की मांग की है। साथ ही पुराने रोस्टर प्रणाली के अनुसार सीधी भर्ती करने, 9 नवंबर 2020 के जनजाति रोस्टर को शून्य मानकर उसी तिथि से सीधी भर्ती एवं पदोन्नति में जनजाति रोस्टर शुरू करने, ओबीसी को राजकीय सेवा में 27 फीसदी आरक्षण देने, पदोन्नति में ओबीसी को आरक्षण देने, बैकलॉग के रिक्त पदों को विशेष भर्ती से भरने, सरकारी संस्थाओं में संविदा व आउटसोर्स के जरिए होने वाली नियुक्तियों में आरक्षण देने की बात भी कही। धरना देने वालों में महामंत्री महेश बुरियाल, मलकराज, विजय भारती, आरएल आर्य, बलदेव टम्टा, कमल टम्टा, बीरपाल, महिपाल कोहली, मनोज मखनवाल, मोहन सोनियाल, धमी बैरवाण, कुंवर बमस्वाल, रमेश आर्य, सुंदर लाल आर्य, पवन भेंतवाल, धीरज श्रीकोटी, राकेश, उमेद बैरवाण, चनंदन शाह, रमेश प्रकाश आदि मौजूद थे।