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चारों धामों के रूटों पर नहीं दिखेंगे इस पर ग्लेशियर
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Fri, 03 Mar 2017 09:42 PM IST
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आगामी तीन मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुल रहे हैं, लेकिन इस बार धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को पैदल मार्ग पर ग्लेशियर नजर नहीं आएंगे। इस सीजन कम बर्फबारी से लिनचोली से रुद्रा प्वाइंट के बीच एकमात्र ग्लेशियर है, जो तेजी से पिघल रहा है। जबकि बीते दो वर्षों में मई तक रास्ते में पांच, छह स्थानों पर 25 से 45 फीट ऊंचे ग्लेशियर पसरे हुए थे।
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बीते वर्ष नवंबर-दिसंबर से लेकर इस वर्ष फरवरी तक सीमित बारिश और बर्फबारी का प्रकोप केदारनाथ व पैदल मार्ग पर साफ दिखाई दे रहा है। रामबाड़ा, टास्क फोर्स चट्टी, निम हेलीपैड, छानी कैंप के समीप इस बार ग्लेशियर का नामों निशान तक नहीं है, जबकि वर्ष 2015-16 में इन स्थानों पर हिमखंड रास्ते तक पसरे हुए थे, जो जून तक भी काफी हद तक बने रहे। इस बार सिर्फ भैरव गदेरे के समीप ग्लेशियर नजर आ रहा है, जो बीते वर्षों की तुलना में काफी कम है।
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हैरानी की बात यह है कि रामबाड़ा से भैरव गदेरे के ऊपरी तरफ घने जंगलों में भी लकदक बर्फ नहीं है। आपदा के बाद से केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य कर रहे नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के कैप्टन सोबन सिंह बिष्ट और हवलदार देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि इस बार बर्फ कम जम रही है।
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धाम में सिर्फ एक फीट बर्फ जमा
केदारनाथ धाम में इन दिनों एक फीट बर्फ है। मंदिर परिसर से लेकर केदारपुरी क्षेत्र में बीते दो वर्षों की तुलना में यह काफी कम है। मंदाकिनी, सरस्वती व दूध गंगा से लगी पहाड़ियों पर भी इस बार बर्फ की मोटी चादर नहीं बिछी है। सबसे बड़ी बात यह है कि मेरू व सुमेरू पर्वत की तलहटी पर भी नाममात्र की बर्फ रह गई है। वहीं द्वितीय केदार मद्महेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ सहित चोपता, दुगलबिट्टा में भी कम बर्फबारी हुई है।
कोट
बर्फबारी के समय में परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमखंडों पर भी असर पड़ रहा है। इस बार बदरी-केदार क्षेत्र में सीमित बर्फबारी के कारण ग्लेशियर नहीं बनना और बर्फ के गिरते ही कुछ ही घंटों में पिघलना भी इसी का परिणाम है।
- डा. महावीर सिंह नेगी, एसोसिएट प्रोफेसर भूगोल, एचएनबीके विवि श्रीनगर गढ़वाल
समय से पहले ही पिघले हिमखंड
उत्तरकाशी। आगामी 29 अप्रैल से शुरू होने वाली गंगोत्री-यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार यात्रा पड़ावों पर हिमखंडों के दर्शन नहीं होंगे। दो वर्षों से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में औसत से कम बर्फबारी के कारण यात्रा सीजन में गंगोत्री में ग्लेशियर आने से बने हिमखंड समय से पहले पिघल गए हैं।
वर्ष 2013 व 2015 में तीर्थयात्रियों ने धराली और जांगला के बीच सड़क में चांगथाग ग्लेशियर पसरा देखा। गंगोत्री रामबाग में भी वर्ष 2015 के तीन मार्च के आसपास चार दिनों तक बर्फबारी हुई। इससे आए ग्लेशियर से भागीरथी कई दिनों तक ढकी रही। वर्ष 2002 में तो ग्लेशियरों ने गंगोत्री में इतनी तबाही मचाई की प्रशासन को हेलीकाप्टर से गंगोत्री की स्थिति का जायजा लेने के लिए हवाई सर्वेक्षण करना पड़ा था।
इस दौरान कई दुकानें और गंगोत्री मंदिर परिसर के कुछ निर्माण ग्लेशियर की चपेट में आने से नष्ट हो गए थे। भोजवासा में एवलांच स्टडी सेंटर ने इस दौरान भोजवासा में 16 फीट बर्फबारी का रिकॉर्ड दर्ज किया था। फरवरी में तीन बार गंगोत्री से लौटकर आए स्वामी राजाराम दास कहते हैं कि इस बार गंगोत्री में ग्लेशियर तो दूर थोड़ी सी बर्फ भी नहीं दिखाई दे रही है। हालांकि यमुनोत्री यात्रा रूटों पर ग्लेशियर कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन बर्फ देखने को मिलती थी। जबकि इस बार धाम में बहुत कम बर्फ टिकी है, जिसका अप्रैल तक टीके रहना मुश्किल है।
बदरीनाथ धाम का रूट भी हुआ बर्फ विहीन
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में इस वर्ष तीर्थयात्रियों को बर्फ के कम ही दर्शन होंगे। इस वर्ष तापमान बढ़ने से समय से पहले ही बर्फ पिघल रही है। बदरीनाथ यात्रा रूट पर जमने वाले चार हिमखंड भी गायब हैं।
बदरीनाथ पहुंचने वाले तीर्थयात्री यात्रा रूट पर पसरे रहने वाले दूध गंगा, कंचन गंगा, रड़ांग बैंड और खचड़ा नाला में हिमखंडों के दर्शन करते थे, लेकिन इस बार हनुमान चट्टी से देश के अंतिम गांव माणा तक कहीं भी हिमखंडों के दर्शन नहीं हो रहे हैं।
हनुमान चट्टी से बदरीनाथ तक हाईवे पूरी तरह से खुला हुआ है। जबकि बीते वर्षों तक मार्च में हनुमान चट्टी से बदरीनाथ तक हाईवे पर करीब एक फीट बर्फ और कंचन गंगा, दूध गंगा और रडांग बैंड में करीब आठ फीट के हिमखंड पसरे हुए रहते थे। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह का कहना है कि बीते सात वर्षों में पहली बार मार्च में बदरीनाथ यात्रा रूट बर्फ विहीन है।
बदरीनाथ धाम में भी मौजूदा समय में महज एक फीट बर्फ ही जमीं हुई है। माणा गांव के पूर्व प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि बदरीनाथ व माणा गांव में जहां मार्च तक भी पांच फीट बर्फ जमीं रहती थी, वहीं इस बार मई में धाम में नाममात्र की बर्फ ही रहेगी।
हेमकुंड रूट पर भी कम ही बर्फ
गोपेश्वर। हेमकुंड साहिब में भी बर्फ कम है। इन दिनों हेमकुंड में करीब सात फीट बर्फ है। यहां यात्रा रूट पर करीब चार फीट तक अटलाकुड़ी हिमखंड आया हुआ है। अटलाकुड़ी से हेमकुंड तक करीब तीन फीट बर्फ यात्रा मार्ग पर जमीं हुई है। गोविंदघाट गुरुद्वारे के वरिष्ठ प्रबंधक सरकार सेवा सिंह का कहना है कि बर्फ नहीं जमने से यात्रा मार्ग को कोई नुकसान नहीं हुआ है।