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पितृ सत्तात्मक सोच भी महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बड़ी वजह

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 03 Dec 2019 12:39 AM IST
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Paternalistic thinking is also a major reason for crimes against women
रुद्रपुर में अपराजिता के तहत आयोजित आखिर कब तक निर्भया विषय पर हुए संवाद में विचार रखती महिलाएं। - फोटो : RUDRAPUR
हैदराबाद में महिला चिकित्सक के साथ हुई हैवानियत की घटना के खिलाफ देशभर में जनआक्रोश है। रुद्रपुर में विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओें ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। अमर उजाला के अपराजिता के बैनर तले सोमवार को रुद्रपुर के राप्रावि खेड़ा में आखिर कब तक निर्भया पर संवाद किया गया।
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जिसमें में महिलाओें ने इस तरह के घृणित कार्य करने वालों को फांसी की सजा देने की मांग उठाई। उन्होंने समाज में महिलाओं के साथ हो रही तरह की हैवानियत के लिए कानूनों के लचीलेपन और समाज की पुत्र सत्तात्मक सोच को सबसे बड़ी वजह बताया।
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महिलाओं ने कहा कि समाज के कुछ ठेकेदार आज भी बेटियों के साथ हो रहे भेदभाव करते हैं। बेटों को मिल रही बेतहाशा आजादी से इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। महिलाओं ने कहा अभिभावकों को सबसे पहले बेटा-बेटी के भेदभाव खत्म करना होगा। अपराधियों के लिए कठोर कानून होने चाहिए ताकि अपराध करने से पहले से वह 10 बार सोचे और कानूूनों से डरे।
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कोट
बच्चों को घरों में अच्छे संस्कार देना बेहद जरूरी है। इस तरह की हैवानियत के पीछे बेटियों के साथ भेदभाव सबसे बड़ा कारण है।
पुष्पा ढाली
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दुष्कर्म के आरोपियों के लिए सीधे फांसी की सजा होनी चाहिए। उनके साथ किसी प्रकार का रहम नहीं होना चाहिए। समाज से पितृसत्तात्मक सोच खत्म होनी चाहिए।
तारा बुधलाकोटी
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हमारे में देश में कानून बहुत लचीले हैं। अपराधी कानूनों के इसी लचीलेपन का फायदा उठाते हैं।
प्रवीन गाबा
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दुष्कर्म के आरोपियों के लिए कठोर सजा व कानून होने चाहिए। ताकि वह अपराध करने से पहले 10 बार सोचे और डरे।
शालिनी गुप्ता
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पितृसत्तात्मक सोच से महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। पुत्र को घर का चिराग और बेटियों को पराया धन जैसे संबोधन महिलाओं को उपेक्षित करते हैं।
चंद्रकला राय
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दुष्कर्म के आरोपियों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। इसके लिए नया कठोर से कठोर कानून बनाये जाने की जरूरत है।
रीता सैनी
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