जखोली विकासखंड के राजस्व ग्राम तरवाड़ी में देव निशाण व पांडव पश्वाओं के गंगा स्नान के साथ पांडव नृत्य शुरू हो गया है। 20 दिनों तक गांव में होने वाले आयोजन में ध्याणियों व प्रवासियों के साथ ही क्षेत्रीय गांवों के भक्त भी शामिल होंगे।
एकादशी को बुधवार सुबह पांच बजे ग्रामीणों ने रुद्रप्रयाग स्थित अलकनंदा व मंदाकिनी के संगम पर देव निशाणों व पांडवों भगवान बद्रीविशाल, लक्ष्मीनारायण, शंकरनाथ, तुंगनाथ, नागराजा, चामुंडा देवी, हित, ब्रह्ममुंडी, भैरवनाथ के निशाणों के साथ पांडवों के अस्त्र-शस्त्रों को गंगा स्नान कराया गया। इसके उपरांत पुजारी व अन्य ब्राह्मणों ने भगवान बद्री विशाल समेत देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हुए हवन व आरती कर तिलक लगाया। इसके बाद निशाण के साथ पांडव पश्वा ढोल-दमाऊं के साथ तरवाड़ी गांव पहुंचे। जहां पर बाण स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ पांडव नृत्य का शुभारंभ हुआ। 20 दिवसीय अनुष्ठान का 14 दिसंबर को समापन होगा। इससे पूर्व मंगलवार शाम को दरमोला, तरवाडी, स्वीली-सेम गांव के ग्रामीण देव निशाण को पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ गंगा स्नान के लिए संगम पर पहुंचे। जहां रात्रिभर जागरण के साथ देवताओं की चार पहर की पूजाएं भी संपन्न की गई। इस मौके पर पांडव नृत्य समिति के अध्यक्ष भोपाल सिंह पंवार, पुजारी कीर्तिराम डिमरी, जसपाल सिंह, किशन रावत, अरविंद पंवार, शूरवीर सिंह, हुकम सिंह, एनएस कप्रवान, चैतराम डिमरी, रविंद्र डिमरी समेत बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे।