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नहर क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों की डेढ़ हजार नाली खेत सूखे
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जखोली ब्लॉक के सिलगढ़ क्षेत्र के शीशो, पंद्रोला सहित अन्य गांवों की 1500 नाली से अधिक सिंचित भूमि पानी के अभाव में सूख रही है। खेतों तक पानी पहुंचाने वाली बंदरतोली-शीशो सिंचाई नहर के लंबे समय से क्षतिग्रस्त होने से काश्तकार खेती छोड़ने को मजबूर हैं, लेकिन विभाग, नहर की मरम्मत के बजाय बजट का रोना रो रहे हैं।
लस्तर नदी से निर्मित बंदरतोली-शीशो सिंचाई नहर लंबे समय से कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो रखी है। ग्रामीणों द्वारा निजी संसाधनों से नहर की मरम्मत के प्रयास भी किए गए, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे बंदरतोली व शीशो गांव के लगभग 250 परिवारों की 1500 नाली सिंचित भूमि सूखे की चपेट में आ गई। जो खेत सोना उगलते थे, वहां बोने के लिए बीज तक नहीं मिल पा रहा था, इससे आहत ग्रामीणों ने कई बार विभाग से नहर की मरम्मत की गुहार लगाई। क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्मला बहुगुणा ने बताया कि गांवों की खेती सिंचाई पर निर्भर है, लेकिन खेतों को पर्याप्त पानी नहीं मिलने से खेती चौपट हो रही है।
जिले में छोटी-बड़ी 30 से अधिक सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिनकी मरम्मत के लिए जिला योजना व आपदा मद में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। धन स्वीकृति पर ही टूटी नहरों की मरम्मत हो पाएगी।
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- पीएस बिष्ट, अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड रुद्रप्रयाग
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लस्तर नदी से निर्मित बंदरतोली-शीशो सिंचाई नहर लंबे समय से कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो रखी है। ग्रामीणों द्वारा निजी संसाधनों से नहर की मरम्मत के प्रयास भी किए गए, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे बंदरतोली व शीशो गांव के लगभग 250 परिवारों की 1500 नाली सिंचित भूमि सूखे की चपेट में आ गई। जो खेत सोना उगलते थे, वहां बोने के लिए बीज तक नहीं मिल पा रहा था, इससे आहत ग्रामीणों ने कई बार विभाग से नहर की मरम्मत की गुहार लगाई। क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्मला बहुगुणा ने बताया कि गांवों की खेती सिंचाई पर निर्भर है, लेकिन खेतों को पर्याप्त पानी नहीं मिलने से खेती चौपट हो रही है।
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जिले में छोटी-बड़ी 30 से अधिक सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिनकी मरम्मत के लिए जिला योजना व आपदा मद में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। धन स्वीकृति पर ही टूटी नहरों की मरम्मत हो पाएगी।
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- पीएस बिष्ट, अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड रुद्रप्रयाग