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इस बार भी हिचकोले खाकर पहुंचेंगे धाम
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Sat, 25 Feb 2017 10:07 PM IST
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kedarnath
- फोटो : file photo
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केदारनाथ आपदा के साढ़े तीन वर्ष बाद भी रुद्रप्रयाग-गौरकुंड हाईवे की स्थिति बदहाल है। सुधारीकरण के नाम पर करोड़ों खर्च के बाद भी मार्गों की स्थिति नहीं सुधरी और हालत देखकर कर भी यही प्रतीत हो रहा है कि इस बार भी यात्रियों को हिचकोले खाकर गौरीकुंड पहुंचना पड़ेगा ?
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76 किमी लंबे रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर डेंजर जोन की भरमार है। भूस्खलन, भूधंसाव, उखड़ा डाबर और टूटे पुश्तों से संकरा हुई सड़क हादसों को न्योता दे रही है। बीती बरसात में टूटे पुश्तों का पुनर्निर्माण कार्य कछुवा गति से हो रहा है। तिलवाड़ा से अगस्त्यमुनि, विजयनगर से सेमी भैंसारी, फाटा से सोनप्रयाग और गौरीकुंड तक राजमार्ग की स्थिति बदहाल है। वहीं आपदा के बाद से भैंसारी में भू-धंसाव जोन सक्रिय होने के कारण करीब एक सौ मीटर सड़क निरंतर धंस रही है।
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बीती बरसात में खाट गांव के नीचे सौ मीटर हिस्सा परेशानी का सबब रहा, जो बरसात में पुन: सक्रिय हो सकता है। बावजूद स्थायी सुधार नहीं हो पाया है। वर्तमान हालात को देखकर यात्रा शुरू होने तक भी राजमार्ग पर जरूरी सुधार हो जाए तो बड़ी बात होगी।
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लोनिवि राजमार्ग निर्माण खंड के ईई प्रवीन कुमार का कहना है कि 10 अप्रैल तक सड़क को ब्लैक टॉप करने के साथ डेंजर जोन पर जरूरी कार्य पूरा कर दिया जाएगा। राजमार्ग चारधाम प्रोजेक्ट में शामिल हैं। इसके लिए हमारे स्तर से अब बृहद कार्य संभव नहीं है।