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केदारनाथ में तीर्थपुरोहितों का आंदोलन जारी
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केदारनाथ में देवस्थानम बोर्ड के विरोध में तीर्थपुरोहितों का आंदोलन 64वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने मंदिर परिसर में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना दिया।
सोमवार को केदारनाथ में केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला के नेतृत्व में तीर्थपुरोहित मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। उन्होंने सरकार पर चारधाम तीर्थपुरोहित व हक-हकूकधारियों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के लिए दो वर्ष से आंदोलन हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चारधाम की प्राचीन परंपरा को बदलने के लिए देवस्थानम बोर्ड का गठन किया था जो उन्हें मंजूर नहीं है। सरकार के लोग, बार-बार कह रहे हैं कि देवस्थानम बोर्ड में सभी के हकों का ध्यान रखा गया है लेकिन आज तक तीर्थपुरोहितों को बोर्ड अधिनियम की प्रति तक मुहैया नहीं कराई गई है। पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने बोर्ड के बारे में पुनर्विचार की बात कही थी लेकिन तीन माह बाद ही उन्हें हटा दिया गया। वहीं, वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है लेकिन एक माह बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के लिए अब आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। इसकी शुरुआत आगामी 1 सितंबर से जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में धरना-प्रदर्शन से होगी।
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सोमवार को केदारनाथ में केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला के नेतृत्व में तीर्थपुरोहित मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। उन्होंने सरकार पर चारधाम तीर्थपुरोहित व हक-हकूकधारियों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के लिए दो वर्ष से आंदोलन हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चारधाम की प्राचीन परंपरा को बदलने के लिए देवस्थानम बोर्ड का गठन किया था जो उन्हें मंजूर नहीं है। सरकार के लोग, बार-बार कह रहे हैं कि देवस्थानम बोर्ड में सभी के हकों का ध्यान रखा गया है लेकिन आज तक तीर्थपुरोहितों को बोर्ड अधिनियम की प्रति तक मुहैया नहीं कराई गई है। पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने बोर्ड के बारे में पुनर्विचार की बात कही थी लेकिन तीन माह बाद ही उन्हें हटा दिया गया। वहीं, वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है लेकिन एक माह बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के लिए अब आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। इसकी शुरुआत आगामी 1 सितंबर से जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में धरना-प्रदर्शन से होगी।
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