तुंगनाथ घाटी के छह ग्राम पंचायतों की आराध्य मां नंदा की लोकजात ननिहाल से विदा होकर अपनी ससुराल मक्कूमठ पहुंच गई है। ग्रामीणों ने आराध्य का भव्य स्वागत किया। साथ ही विधि-विधान के साथ देवी की मूर्ति को मंदिर में विराजमान किया गया। अब, अगले वर्ष अश्विन माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आठ दिवसीय लोकजात शुरू होगी।
बुधवार को मां नंदा की डोली की ननिहाल गांव सारी में विशेष पूजा-अर्चना की गई। विधि-विधान से परंपराओं का निर्वहन करते हुए ध्याणियों, ग्रामीणों व प्रवासियों ने पूजा-अर्चना की। साथ ही आरती उतारकर शृंगार के साथ प्रतिमा को कंडी में विराजमान किया गया। मौके पर जागर गायिका रामेश्वरी देवी, कुब्जा देवी, नर्मदा देवी व गुड्डी देवी ने मां नंदा के गीत, मांगल व जागर गाए। दोपहर बाद मां नंदा की डोली को कलेऊ व शृंगार सामग्री भेंट के साथ ननिहाल के मैतियों ने ससुराल के लिए विदा किया। ग्रामीण, गांव की सीमा तक डोली को विदा करने गए। वहां पर मक्कूमठ के ग्रामीणों ने देवी डोली का स्वागत किया और और कंडी में विराजमान आराध्य को गांव तक पहुंचाया। इस मौके पर ग्राम प्रधान मनोरमा देवी, सरपंच भगत सिंह, पूर्व सरपंच मुरली सिंह, ईको विकास समिति के अध्यक्ष मनोज नेगी, महिला मंगल अध्यक्ष मंजू नेगी, युवक मंगल दल अध्यक्ष धमेंद्र भट्ट, कोषाध्यक्ष रघुवीर सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान विक्रम सिंह आदि मौजूद थे।