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जर्जर ट्रालियों के सहारे हो रहे पार
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रप्रयाग
Updated Sat, 23 Jul 2016 09:31 PM IST
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दोपहर 1.20 बजे हैं। विजयनगर में मंदाकिनी नदी के किनारे ट्राली से छुट्टी के बाद घर पहुंचने के लिए छात्र खड़े हैं। यहां ट्राली के नाम पर केवल एक तख्ते का पट्टा मात्र है, जो तारों से खींचकर एक छोर से दूसरे छोर पर पहुंच रहा है।
हल्की बूंदाबांदी के बीच स्कूली बच्चे ट्राली से नदी के दूसरे छोर पर पहुंचते रहे। जिन हालात में ये नौनिहाल ट्राली से नदी पार कर रहे थे, उसे देखकर किसी के रोंगटे खड़े हो सकते हैं। माता-पिता हर रोज भगवान से उनकी कुशलता की कामना कर रहे हैं। बावजूद इसके सरकारी अमला तमाशा देख रहा है।
आपदा के तीन वर्ष बाद भी केदारघाटी का जीवन जर्जर ट्रालियों के सहारे झूल रहा है। विजयनगर में मंदाकिनी नदी पर लगी ट्राली से प्रतिदिन 50 से अधिक गांवों के स्कूली बच्चों के साथ-साथ अन्य ग्रामीण अगस्त्यमुनि पहुंचते हैं। जिस हाल में यह ट्राली है, उससे कभी भी किसी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है। इन दिनों आए दिन हो रही बारिश और उफान पर बहती नदी से पहले ही लोग सहमे हुए हैं। ऐसे में ट्राली से आवाजाही और भी मुश्किल है। बावजूद स्कूली बच्चे जान हथेली पर रखकर पढ़ने के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं। यही स्थिति चंद्रापुरी में भी है। हैरत यह है कि जिलाधिकारी डा. राघव लंगर की ओर से लोनिवि अधिकारियों के खिलाफ सचिव को भेजे पत्रों के बाद भी विभाग सक्रिय नहीं हो पाया है।
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इधर, सामाजिक कार्यकर्ता सावन नेगी का कहना है कि विजयनगर पुल का निर्माण दो माह में पूरा नहीं किया गया तो, जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
कई लोग हो चुके चोटिल
आपदा के बाद वैकल्किक सुविधा के लिए लगाई गई ये ट्रालियां लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। सिल्ली, विजयनगर और चंद्रापुरी में ट्राली के कारण तीन वर्षो में 15 से अधिक लोग घायल हुए। जिसमें एक छात्रा ट्राली से गिर गई थी, जिसे बमुश्किल से बचाया जा सका। जबकि एक नेपाली बच्चे का पूरा हाथ ही कट गया था।
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हल्की बूंदाबांदी के बीच स्कूली बच्चे ट्राली से नदी के दूसरे छोर पर पहुंचते रहे। जिन हालात में ये नौनिहाल ट्राली से नदी पार कर रहे थे, उसे देखकर किसी के रोंगटे खड़े हो सकते हैं। माता-पिता हर रोज भगवान से उनकी कुशलता की कामना कर रहे हैं। बावजूद इसके सरकारी अमला तमाशा देख रहा है।
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आपदा के तीन वर्ष बाद भी केदारघाटी का जीवन जर्जर ट्रालियों के सहारे झूल रहा है। विजयनगर में मंदाकिनी नदी पर लगी ट्राली से प्रतिदिन 50 से अधिक गांवों के स्कूली बच्चों के साथ-साथ अन्य ग्रामीण अगस्त्यमुनि पहुंचते हैं। जिस हाल में यह ट्राली है, उससे कभी भी किसी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है। इन दिनों आए दिन हो रही बारिश और उफान पर बहती नदी से पहले ही लोग सहमे हुए हैं। ऐसे में ट्राली से आवाजाही और भी मुश्किल है। बावजूद स्कूली बच्चे जान हथेली पर रखकर पढ़ने के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं। यही स्थिति चंद्रापुरी में भी है। हैरत यह है कि जिलाधिकारी डा. राघव लंगर की ओर से लोनिवि अधिकारियों के खिलाफ सचिव को भेजे पत्रों के बाद भी विभाग सक्रिय नहीं हो पाया है।
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इधर, सामाजिक कार्यकर्ता सावन नेगी का कहना है कि विजयनगर पुल का निर्माण दो माह में पूरा नहीं किया गया तो, जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
कई लोग हो चुके चोटिल
आपदा के बाद वैकल्किक सुविधा के लिए लगाई गई ये ट्रालियां लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। सिल्ली, विजयनगर और चंद्रापुरी में ट्राली के कारण तीन वर्षो में 15 से अधिक लोग घायल हुए। जिसमें एक छात्रा ट्राली से गिर गई थी, जिसे बमुश्किल से बचाया जा सका। जबकि एक नेपाली बच्चे का पूरा हाथ ही कट गया था।