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Rudraprayag News: पहाड़ में इलाज की आस अधूरी, विशेषज्ञों के लिए मैदानों की दौड़
Sat, 17 Oct 2026 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Sat, 17 Oct 2026 11:40 PM IST
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सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त, जनरल सर्जन पढ़ाई करने गए
अगस्त्यमुनि। पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा रही है। केदारघाटी के प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है, जबकि जनरल सर्जन डॉ. वैभव विशाल पढ़ाई के सिलसिले में बाहर हैं। ऐसे में उपचार की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी हो रही है। लोगों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सीएचसी में प्रतिदिन करीब 300 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। गुप्तकाशी, ऊखीमठ, बसुकेदार समेत दूरस्थ गांवों की महिलाएं भी यहां स्वास्थ्य जांच कराने आती हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी उनकी उम्मीदों पर भारी पड़ रही है। मैदानी क्षेत्रों में जहां मरीजों को बड़े अस्पतालों और विशेषज्ञों तक पहुंचने के अधिक विकल्प मिलते हैं, वहीं पहाड़ में लंबी दूरी, सीमित परिवहन और महंगे इलाज की दोहरी चुनौती बनी रहती है।
स्थानीय निवासी दीपा देवी आर्य का कहना है कि पहाड़ों में स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। शहरों की तुलना में पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। भौंसाल निवासी पुष्कर रावत ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए संघर्ष करना पड़ता है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में चोटिल लोगों को भी समय पर उपचार मिलना जरूरी है।
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वहीं अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमा असवाल ने बताया कि डॉ. वैभव विशाल की नियुक्ति जनरल सर्जन के पद पर है, लेकिन वह पढ़ाई के सिलसिले में बाहर गए हैं। वहीं, स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है।
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अगस्त्यमुनि। पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा रही है। केदारघाटी के प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है, जबकि जनरल सर्जन डॉ. वैभव विशाल पढ़ाई के सिलसिले में बाहर हैं। ऐसे में उपचार की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी हो रही है। लोगों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सीएचसी में प्रतिदिन करीब 300 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। गुप्तकाशी, ऊखीमठ, बसुकेदार समेत दूरस्थ गांवों की महिलाएं भी यहां स्वास्थ्य जांच कराने आती हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी उनकी उम्मीदों पर भारी पड़ रही है। मैदानी क्षेत्रों में जहां मरीजों को बड़े अस्पतालों और विशेषज्ञों तक पहुंचने के अधिक विकल्प मिलते हैं, वहीं पहाड़ में लंबी दूरी, सीमित परिवहन और महंगे इलाज की दोहरी चुनौती बनी रहती है।
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स्थानीय निवासी दीपा देवी आर्य का कहना है कि पहाड़ों में स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। शहरों की तुलना में पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। भौंसाल निवासी पुष्कर रावत ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए संघर्ष करना पड़ता है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में चोटिल लोगों को भी समय पर उपचार मिलना जरूरी है।
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वहीं अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमा असवाल ने बताया कि डॉ. वैभव विशाल की नियुक्ति जनरल सर्जन के पद पर है, लेकिन वह पढ़ाई के सिलसिले में बाहर गए हैं। वहीं, स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है।