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हेलीकाप्टरों की गर्जना से गूंज रहा आसमान
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Thu, 02 Jun 2016 08:35 PM IST
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केदारनाथ यात्रा को लेकर हेलीकाप्टरों की गर्जना दिनभर गूंज रही है। गुप्तकाशी से शेरसी तक बने आठ हेलीपैड से 13 हेली कंपनियों के हेलीकाप्टर सुबह 6 से शाम के 6 बजे तक केदारनाथ के लिए उड़ान भर रहे हैं। 9 मई को बाबा केदार के कपाट खुलने के दिन से धाम के लिए हेलीकाप्टर सेवा शुरू हो गई थी।
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पहले दिन हेलीकाप्टर से 76 चक्कर में 375 लोगों को धाम पहुंचाया गया था। यात्रा के आगे बढ़ने के साथ ही हेलीकाप्टर की संख्या और शटल (चक्कर) की संख्या भी बढ़ती जा रही है। हेलीकाप्टर प्रतिदिन तीन सौ से अधिक शटल की जा रही है। 9 से 31 मई तक 23 दिन में 8 हेलीपैड से उड़ रहे 13 हेलीकाप्टर 5610 शटल किए हैं।
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इस दौरान 32 हजार से अधिक यात्री केदारनाथ गए हैं और 28 हजार लौटे। हेलीकाप्टर से औसतन 243 शटल प्रतिदिन की जा रही है। ऐसे में आसमान में जाम की स्थिति बनी हुई है। जबकि बीते वर्ष 23 दिन की यात्रा में 10 हेली कंपनियों ने 4292 शटल की थी। तब 21 हजार से अधिक श्रद्धालु धाम पहुंचे थे।
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केदारनाथ के लिए हेलीकाप्टर सेवा को लेकर वर्ष 2012 में इनर्जी इनफारमेंशन एसोसिएशन ऑफ यूनाइटेड स्टेट की गाइड लाइन पर जीबी पंत हिमालयन पर्यावरण संस्थान (पर्यावरण एवं वन मंत्रालय) श्रीनगर गढ़वाल की ओर से किए गए शोध में पाया गया कि केदारघाटी में चल रही हवाई सेवा से दुर्लभ जीव जंतुओं के व्यवहार में परिवर्तन आया है। इनकी प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ा है।
उड़ान के दौरान हाइट मेंटिनेंस नहीं करने से पालतू पशुओं का आचरण बदल रहा है। ध्वनि के मानकों की भी हेली कंपनियां अनदेखी कर रही हैं।
स्थानीय निवासी दिनेश बगवाड़ी और लोकेश कर्नाटकी का कहना है कि हेलीकाप्टर सेवा का संचालन ठीक है, लेकिन हाइट मेंटिनेंस नहीं होने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। शासन, प्रशासन और हेली कंपनियां एनजीटी के मानकों की अनदेखी कर रही हैं।
केदारनाथ के लिए संचालित हेलीकाप्टर उड़ान के लिए जो मानक बनाए गए हैं, उनका पालन होना जरूरी है। निरंतर अत्यधिक शोर और कार्बन डाईआक्साइड गैस का उत्सर्जन मानव और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है।
- जगत सिहं जंगली, प्रसिद्ध पर्यावरणविद् रुद्रप्रयाग
हेलीकापटर डीजीसीए के निर्देशों के तहत संचालित हो रहे हैं। शासन, प्रशासन की ओर से भी समय-समय पर हेली कंपनियों को निर्देशित किया जा रहा है। इस संबंध में लगातार निरीक्षण हो रहा है।
- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग