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यूएस नगर के 342 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय मुखिया विहीन
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रुद्रपुर। शिक्षा मंत्री का गृह जनपद होने के बावजूद ऊधमसिंह नगर में बेसिक शिक्षा में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा। जिले के 342 राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लंबे समय से प्रधानाध्यापकों के पद रिक्त हैं, जबकि अधिकतर विद्यालयों में सहायक अध्यापक पर ही प्रधानाध्यापक पद का प्रभार है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता के साथ अनुशासन प्रभावित हो रहा है।
विलीनीकरण के नाम पर एक ओर सरकारी विद्यालय बंद हो रहे हैं, वहीं हर गली कूचे में व्यावसायिक दृष्टिकोण से चल रहे निजी विद्यालय खूब पनप रहे हैं। बावजूद इसके सरकार राजकीय विद्यालयों पर अधिक ध्यान नहीं दे रही।
जिले में उच्च और प्राथमिक विद्यालय
जिले में 790 प्राथमिक और 202 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। प्राथमिक में कक्षा एक से पांचवीं तक 62,681 बच्चे, जबकि उच्च प्राथमिक में कक्षा छह से आठ तक 31,149 बच्चे पढ़ रहे हैं। जिले के 274 प्राथमिक और 68 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लंबे समय से प्रधानाध्यापकों के पद रिक्त हैं, जबकि प्राथमिक में प्रधानाध्यापक के 607 व उच्च प्राथमिक में 108 पद स्वीकृत हैं।
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सहायक शिक्षकों के 92 पद रिक्त
सहायक शिक्षकों के जिले में कुल 2843 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 92 रिक्त हैं। सहायक अध्यापकों की पदोन्नति एवं नई भर्ती नहीं होने से विद्यालयों में अनुशासन के साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
राप्रावि रम्पुरा में 520 बच्चों को पढ़ा रहे पांच अध्यापक
रुद्रपुर। जिले के कई प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षकों का अभाव है, इससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मसलन, राजकीय प्राथमिक विद्यालय रंपुरा में 520 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन विद्यालय में सिर्फ दो सहायक शिक्षक हैं। तीन सहायक अध्यापकों को दूसरे विद्यालयों से समायोजित किया गया है, जबकि शिक्षा के अधिकार के मानकों के अनुसार विद्यालय में 13 सहायक प्राध्यापक होने चाहिए।
जिले में प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों की कमी का प्रमुख कारण सहायक अध्यापकों की समय पर पदोन्नति न होना। कई सहायक अध्यापक 15 साल की नौकरी के बावजूद प्रधानाध्यापक नहीं बन सके हैं। जिले में पिछले वर्ष तीन साल बाद पदोन्नति हुई थी, जबकि पदोन्नति प्रति वर्ष होनी चाहिए। - दीपक सिंह फर्त्याल, जिला मंत्री राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ।
जिले के अधिकतर राजकीय विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने के कारण प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति में दिक्कतें आ रही हैं। इसके बावजूद विभाग की ओर से पदोन्नति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में प्राथमिक शिक्षकों की कमी नहीं है। विद्यालयों के विलीनीकरण के बाद वर्तमान शिक्षकों की ही संख्या अधिक पड़ने की संभावना है। - अशोक कुमार सिंह, डीईओ बेसिक।
अभिभावक बोले, सरकारी स्कूलों में सुविधाओं का अभाव
रुद्रपुर। सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई को लेकर अभिभावकों की मिली-जुली राय रही। कुछ अभिभावक से संतुष्ट नजर आए तो कुछ बच्चों के मानसिक विकास के लिए अतिरिक्त सुविधाएं न मिलने पर चिंतित दिखे। कई अभिभावकों का कहना है कि राजकीय विद्यालयों के शिक्षक मोटा वेतन लेने के बावजूद निजी स्कूलों में पांच हजार रुपये वेतन पाने वाले शिक्षकों के बराबर भी मेहनत नहीं करते। रंपुरा निवासी सुषमा ने कहा कि उनका बेटा सरकारी स्कूल में पढ़ता है। पढ़ाई तो ठीक-ठाक होती है, लेकिन स्कूल से समय पर न ड्रेस मिलती है ना ही अन्य सुविधाएं। रंपुरा निवासी डौली ने कहा कि उनकी दो बेटियां सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं। यदि सरकार की ओर स्कूली बच्चों को मिलने वाली सभी सुविधाएं आसानी से मिलने लगें तो इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था के स्तर में सुधार होगा। अभिभावक भूपराम ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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विलीनीकरण के नाम पर एक ओर सरकारी विद्यालय बंद हो रहे हैं, वहीं हर गली कूचे में व्यावसायिक दृष्टिकोण से चल रहे निजी विद्यालय खूब पनप रहे हैं। बावजूद इसके सरकार राजकीय विद्यालयों पर अधिक ध्यान नहीं दे रही।
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जिले में उच्च और प्राथमिक विद्यालय
जिले में 790 प्राथमिक और 202 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। प्राथमिक में कक्षा एक से पांचवीं तक 62,681 बच्चे, जबकि उच्च प्राथमिक में कक्षा छह से आठ तक 31,149 बच्चे पढ़ रहे हैं। जिले के 274 प्राथमिक और 68 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लंबे समय से प्रधानाध्यापकों के पद रिक्त हैं, जबकि प्राथमिक में प्रधानाध्यापक के 607 व उच्च प्राथमिक में 108 पद स्वीकृत हैं।
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सहायक शिक्षकों के 92 पद रिक्त
सहायक शिक्षकों के जिले में कुल 2843 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 92 रिक्त हैं। सहायक अध्यापकों की पदोन्नति एवं नई भर्ती नहीं होने से विद्यालयों में अनुशासन के साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
राप्रावि रम्पुरा में 520 बच्चों को पढ़ा रहे पांच अध्यापक
रुद्रपुर। जिले के कई प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षकों का अभाव है, इससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मसलन, राजकीय प्राथमिक विद्यालय रंपुरा में 520 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन विद्यालय में सिर्फ दो सहायक शिक्षक हैं। तीन सहायक अध्यापकों को दूसरे विद्यालयों से समायोजित किया गया है, जबकि शिक्षा के अधिकार के मानकों के अनुसार विद्यालय में 13 सहायक प्राध्यापक होने चाहिए।
जिले में प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों की कमी का प्रमुख कारण सहायक अध्यापकों की समय पर पदोन्नति न होना। कई सहायक अध्यापक 15 साल की नौकरी के बावजूद प्रधानाध्यापक नहीं बन सके हैं। जिले में पिछले वर्ष तीन साल बाद पदोन्नति हुई थी, जबकि पदोन्नति प्रति वर्ष होनी चाहिए। - दीपक सिंह फर्त्याल, जिला मंत्री राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ।
जिले के अधिकतर राजकीय विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने के कारण प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति में दिक्कतें आ रही हैं। इसके बावजूद विभाग की ओर से पदोन्नति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में प्राथमिक शिक्षकों की कमी नहीं है। विद्यालयों के विलीनीकरण के बाद वर्तमान शिक्षकों की ही संख्या अधिक पड़ने की संभावना है। - अशोक कुमार सिंह, डीईओ बेसिक।
अभिभावक बोले, सरकारी स्कूलों में सुविधाओं का अभाव
रुद्रपुर। सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई को लेकर अभिभावकों की मिली-जुली राय रही। कुछ अभिभावक से संतुष्ट नजर आए तो कुछ बच्चों के मानसिक विकास के लिए अतिरिक्त सुविधाएं न मिलने पर चिंतित दिखे। कई अभिभावकों का कहना है कि राजकीय विद्यालयों के शिक्षक मोटा वेतन लेने के बावजूद निजी स्कूलों में पांच हजार रुपये वेतन पाने वाले शिक्षकों के बराबर भी मेहनत नहीं करते। रंपुरा निवासी सुषमा ने कहा कि उनका बेटा सरकारी स्कूल में पढ़ता है। पढ़ाई तो ठीक-ठाक होती है, लेकिन स्कूल से समय पर न ड्रेस मिलती है ना ही अन्य सुविधाएं। रंपुरा निवासी डौली ने कहा कि उनकी दो बेटियां सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं। यदि सरकार की ओर स्कूली बच्चों को मिलने वाली सभी सुविधाएं आसानी से मिलने लगें तो इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था के स्तर में सुधार होगा। अभिभावक भूपराम ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।