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हथचरखा और जलचरखा केंद्र के दिन बहुरनें की आस जगी
ब्यूरो अमर उजाला रुद्रप्रयाग
Updated Mon, 18 Jul 2016 10:16 PM IST
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खंडहर में तब्दील हो चुके घोलतीर के हथचरखा और जलचरखा केंद्र के दिन बहुरनें की आस जगी है। डीएम ने मामले का संज्ञान लेते हुए उद्योग विभाग को केंद्र की स्थिति के बारे में रिपोर्ट तैयार करने और भावी संभावनाओं को लेकर सुझाव देने के निर्देश दिए हैं।
सोमवार को जिला योजना की बैठक में डीएम ने कहा कि यूपी शासन में अगर इस तरह के लघु उद्योग स्थापित किए गए थे, तो उन्हें पुनर्जीवित किया जा सकता है। कहा कि इस तरह के लघु-कुटीर केंद्र क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। उन्होंने जिला उद्योग विभाग के महाप्रबंधक को केंद्र की पूरी जानकारी और भावी संभावनाओं को लेकर तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा।
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विदित हो कि इस विषय पर अमर उजाला ने 17 जुलाई के अंक में पेज 14 पर कभी मैंने गांव को किया रोशन, खबर प्रकाशित की थी। डीएम ने खबर का संज्ञान लेते हुए सोमवार को जिला समिति की बैठक में संबंधित विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इधर, डीएम के इस निर्णय पर घोलतीर के जय सिंह बिष्ट और शीशुपाल सिंह ने खुशी जताई है।
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वर्ष 1960 में यूपी शासन द्वारा घोलतीर में स्थापित हथचरखा केंद्र और वर्ष 1962 में उसे उच्चीकृत कर जलचरखा केंद्र बनाया गया था। यह केंद्र तब क्षेत्र के युवाओं के लिए जहां रोजगार का प्रमुख जरिया था। वहीं यहां बनने ऊन उत्पादों पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध थे। पंखी व धन बनाने के साथ ही ऊनी उत्पादों की रंगाई व पुताई का कार्य होता था।