{"_id":"5e4d82fb8ebc3ef2836807da","slug":"guideline-is-not-followed-rudrapur-news-hld374311612","type":"story","status":"publish","title_hn":"चहेतों की ताजपोशी में यूजीसी की गाइड लाइन दरकिनार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चहेतों की ताजपोशी में यूजीसी की गाइड लाइन दरकिनार
विज्ञापन
पंत विवि का प्रशासनिक भवन।
- फोटो : RUDRAPUR
विवि में चल रहे डीन-डायरेक्टर्स के पदों की भर्ती में चहेतों की ताजपोशी के लिए यूजीसी की मानक 120 अंक एकेडेमिक परफोरमेंस इंडेक्स (एपीआई) स्कोर को दरकिनार कर अपना आवेदन प्रारूप जारी किया है। मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अवधेश कुमार ने विवि प्रशासन पर भर्ती में धांधली का आरोप लगाते हुए न्यायालय की शरण में जाने की बात कही है। इतना ही नहीं, इस भर्ती के विरोध में दो जनहित व न्यायिक याचिकाएं भी न्यायालय में दायर की जा चुकीं हैं।
डॉ. अवधेश ने कहा कि पंतनगर विवि द्वारा 14 अगस्त 2019 को 7 महाविद्यालयों में डीन सहित डायरेक्टर रिसर्च व डायरेक्टर एक्सटेंशन के पदों पर भर्ती के लिए पांच वर्ष अवधि के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया था। इसमें कहीं भी न्यूनतम या अधिकतम आयु सीमा का कोई जिक्र नहीं है। डीन फिशरीज का पद प्रत्येक वर्ष के लिए उत्तराखंड शासन से मंजूर किया जाता है। डीन पद पर सीधी भर्ती के लिए यूजीसी के अनुसार पीएचडी के साथ यूजीसी के अनुरूप एपीआई की अनिवार्यता है, जबकि विज्ञापन में यूजीसी रेग्यूलेशन-2018 की अनदेखी की गई है।
31 अगस्त 2019 के संशोधित विज्ञापन में विवि के परिनियमों के अध्याय 13 प्रस्तर 4 (एफ)(1) का उल्लेख किया गया है, जबकि विवि नियमावली में ऐसा कोई नियम मौजूद ही नहीं है। यूजीसी के अनुसार स्क्रीनिंग कमेटी में एससी/एसटी/ओबीसी /माइनॉरिटी व महिला सदस्य के रूप में प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, जो विज्ञापित पदों से उच्च या वरिष्ठ समकक्ष होना चाहिए, जिसकी अनदेखी की गई है। पारदर्शिता के लिए अभ्यर्थी का एपीआई स्कोर कार्ड प्रदर्शित करना एवं साक्षात्कार के लिए स्वीकृत या अस्वीकृत होने का कारण बताने सहित अभ्यर्थी को सूचित करना आवश्यक है, जिसका पालन नहीं किया।
विज्ञापन
संबंधित भर्ती में अभ्यर्थियों की साढ़े तीन वर्षों की अनिवार्य अवशेष सेवा को घटाकर ढाई वर्ष कर दिया गया। यूजीसी के अनुसार 120 अंकों की एपीआई में केवल शोध पत्रों, पुस्तकों, शोध परियोजनाओं, पेटेंट, पालिसी डॉक्यूमेंट, रिसर्च गाइडेंस तथा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आमंत्रित व्याख्यानों हेतु ही अंक प्रदान किए गए हैं। विवि ने इसे दरकिनार करते हुए शैक्षणिक डिग्रियों, मेडल, पोस्ट डॉक्टरल फैलो व आंतरिक व्यवस्थाओं से संबंधित मदों पर 42 अंकों की बर्बादी के साथ यूजीसी द्वारा अन्य मदों में निर्धारित अंकों को कम कर दिया है। वहीं संबंधित मामले में सवाल पूछने पर कुलपति बोले कि हमने जो किया वह नियमानुसार है।
विज्ञापन
डॉ. अवधेश ने कहा कि पंतनगर विवि द्वारा 14 अगस्त 2019 को 7 महाविद्यालयों में डीन सहित डायरेक्टर रिसर्च व डायरेक्टर एक्सटेंशन के पदों पर भर्ती के लिए पांच वर्ष अवधि के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया था। इसमें कहीं भी न्यूनतम या अधिकतम आयु सीमा का कोई जिक्र नहीं है। डीन फिशरीज का पद प्रत्येक वर्ष के लिए उत्तराखंड शासन से मंजूर किया जाता है। डीन पद पर सीधी भर्ती के लिए यूजीसी के अनुसार पीएचडी के साथ यूजीसी के अनुरूप एपीआई की अनिवार्यता है, जबकि विज्ञापन में यूजीसी रेग्यूलेशन-2018 की अनदेखी की गई है।
विज्ञापन
31 अगस्त 2019 के संशोधित विज्ञापन में विवि के परिनियमों के अध्याय 13 प्रस्तर 4 (एफ)(1) का उल्लेख किया गया है, जबकि विवि नियमावली में ऐसा कोई नियम मौजूद ही नहीं है। यूजीसी के अनुसार स्क्रीनिंग कमेटी में एससी/एसटी/ओबीसी /माइनॉरिटी व महिला सदस्य के रूप में प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, जो विज्ञापित पदों से उच्च या वरिष्ठ समकक्ष होना चाहिए, जिसकी अनदेखी की गई है। पारदर्शिता के लिए अभ्यर्थी का एपीआई स्कोर कार्ड प्रदर्शित करना एवं साक्षात्कार के लिए स्वीकृत या अस्वीकृत होने का कारण बताने सहित अभ्यर्थी को सूचित करना आवश्यक है, जिसका पालन नहीं किया।
विज्ञापन
संबंधित भर्ती में अभ्यर्थियों की साढ़े तीन वर्षों की अनिवार्य अवशेष सेवा को घटाकर ढाई वर्ष कर दिया गया। यूजीसी के अनुसार 120 अंकों की एपीआई में केवल शोध पत्रों, पुस्तकों, शोध परियोजनाओं, पेटेंट, पालिसी डॉक्यूमेंट, रिसर्च गाइडेंस तथा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आमंत्रित व्याख्यानों हेतु ही अंक प्रदान किए गए हैं। विवि ने इसे दरकिनार करते हुए शैक्षणिक डिग्रियों, मेडल, पोस्ट डॉक्टरल फैलो व आंतरिक व्यवस्थाओं से संबंधित मदों पर 42 अंकों की बर्बादी के साथ यूजीसी द्वारा अन्य मदों में निर्धारित अंकों को कम कर दिया है। वहीं संबंधित मामले में सवाल पूछने पर कुलपति बोले कि हमने जो किया वह नियमानुसार है।