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प्रदेश की पंजीकृत पहली कुक्कुट नस्ल ’उत्तरा’ को बढ़ावा देने की जरूरत
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पंतनगर में कुक्कुट फार्म का भ्रमण करती आईईसीएसएमई की टीम।
- फोटो : RUDRAPUR
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इंडो-यूरोपियन चेंबर ऑफ स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (आईईसीएसएमई) के तीन सदस्यीय दल ने बुधवार को जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न शोध केंद्रों का भ्रमण कर जानकारी ली।
सदस्यों ने पोल्ट्री फार्म पर संयुक्त निदेशक डॉ. एके घोष व सह निदेशक डॉ राजीव रंजन कुमार से जिले के 314 ग्राम पंचायतों में बैकयार्ड पोल्ट्री मॉडल विकसित करने और उनमें पंतनगर से प्रदेश की पहली पंजीकृत प्रजाति उत्तरा फाउल को बढ़ावा देने संबंधी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश सरकार सहित उन्हें भी भेजने को कहा।
उन्होंने राष्ट्रीय कामधेनु योजना के तहत गाय की साहीवाल प्रजाति को बढ़ावा देने के लिए एक प्रस्ताव उत्तराखंड सरकार के साथ इंडो-यूरोपियन चेंबर को भेजने को कहा। इधर, औषधीय विज्ञान केंद्र के सह निदेशक डा. एमएस नेगी ने केंद्र में हो रहे शोध कार्यों से टीम को अवगत कराया। टीम ने केंद्र प्रभारी डा. वीके राव को युवाओं को फूलों की खेती में रुझान पैदा करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने को कहा।
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मशरूम शोध केंद्र के संयुक्त निदेशक डा. केपीएस कुशवाहा ने मशरूम उत्पादन तकनीक और उत्पादन पर टीम को अवगत कराया। वहां पर नारमन ई बोरलॉग शोध केंद्र के प्रभारी डा. वीपी सिंह, मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के सह निदेशक डा. अनूप सचान, अधिष्ठाता कृषि डॉ. शिवेंद्र कश्यप आदि थे। टीम ने बुधवार शाम विवि कुलपति डा. तेज प्रताप के साथ बैठक कर अपने दौरे को सफल बताया। तीन सदस्यीय टीम में अध्यक्ष विजय तिवारी, महासचिव लक्ष्मी ठाकुर सिंह तथा सचिव मनोज सिंह थे।
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सदस्यों ने पोल्ट्री फार्म पर संयुक्त निदेशक डॉ. एके घोष व सह निदेशक डॉ राजीव रंजन कुमार से जिले के 314 ग्राम पंचायतों में बैकयार्ड पोल्ट्री मॉडल विकसित करने और उनमें पंतनगर से प्रदेश की पहली पंजीकृत प्रजाति उत्तरा फाउल को बढ़ावा देने संबंधी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश सरकार सहित उन्हें भी भेजने को कहा।
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उन्होंने राष्ट्रीय कामधेनु योजना के तहत गाय की साहीवाल प्रजाति को बढ़ावा देने के लिए एक प्रस्ताव उत्तराखंड सरकार के साथ इंडो-यूरोपियन चेंबर को भेजने को कहा। इधर, औषधीय विज्ञान केंद्र के सह निदेशक डा. एमएस नेगी ने केंद्र में हो रहे शोध कार्यों से टीम को अवगत कराया। टीम ने केंद्र प्रभारी डा. वीके राव को युवाओं को फूलों की खेती में रुझान पैदा करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने को कहा।
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मशरूम शोध केंद्र के संयुक्त निदेशक डा. केपीएस कुशवाहा ने मशरूम उत्पादन तकनीक और उत्पादन पर टीम को अवगत कराया। वहां पर नारमन ई बोरलॉग शोध केंद्र के प्रभारी डा. वीपी सिंह, मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के सह निदेशक डा. अनूप सचान, अधिष्ठाता कृषि डॉ. शिवेंद्र कश्यप आदि थे। टीम ने बुधवार शाम विवि कुलपति डा. तेज प्रताप के साथ बैठक कर अपने दौरे को सफल बताया। तीन सदस्यीय टीम में अध्यक्ष विजय तिवारी, महासचिव लक्ष्मी ठाकुर सिंह तथा सचिव मनोज सिंह थे।