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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rudraprayag News ›   Fever medication for 35 km race

बुखार की दवा के लिए भी 35 किमी की दौड़

Wed, 09 Dec 2015 06:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रप्रयाग
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रप्रयाग Updated Wed, 09 Dec 2015 06:00 PM IST
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पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था भी दम तोड़ रही है। डेढ़ दशक में गांव से सुविधाओं के अभाव में तीस परिवार पलायन कर चुके हैं।
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रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से 36 किमी दूर अगस्त्यमुनि ब्लाक के बेंजी-कांडई गांव में सरकारी सुविधाएं खानापूर्ति साबित हो रही हैं। 75 परिवारों वाले इस गांव में जलसंस्थान की पेयजल लाइन शो-पीश बनी हुई है। ग्रामीण डेढ़ किमी दूर प्राकृतिक स्रोत से पानी ला रहे हैं। गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं के टीकाकरण के लिए 35 किमी दूर जिला अस्पताल आना पड़ रहा है।

गांव में बिजली की लाइन पर कब फॉल्ट आ जाए, कहा नहीं जा सकता। लो-वोल्टेज की समस्या अलग है। यहां इंटर कालेज में दो दशक से प्रधानाचार्य नहीं है। गांव के वयोवृद्ध रविदत्त पुरोहित, सामाजिक कार्यकर्ता ललित मोहन कांडपाल, आनंद सिंह राणा, कमलकांत बताते हैं कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी गांव को न पर्याप्त पानी मिला न सड़क। जरूरी सुविधाएं नहीं होने से डेढ़ दशक में गांव से 35 परिवार पलायन कर अन्यत्र बस गए हैं।
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शहीद के नाम पर की गई घोषणाएं भूली सरकार
रुद्रप्रयाग। बेंजी-कांडई गांव के वीर सपूत सुनील कांडपाल ने कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा में अपने शौर्य का परिचय देते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। तब केंद्र व यूपी सरकार ने गांव को सड़क से जोड़ने, सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखने, गांव में शहीद स्मारक बनाने, जीआईसी बेंजी-कांडई का नाम शहीद के नाम पर रखने की घोषणा की थी। अब 16 वर्ष बाद भी ये घोषणा धरातल पर नहीं उतर पाईं। शहीद की मां सुलोचना देवी बताती हैं गांव में एक स्मारक बन जाता तो अच्छा होता।
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शहीद का गांव होने के बावजूद बेंजी-कांडई में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। विकास तो दूर, शहीद के नाम पर की गई घोषणाएं भी केंद्र व राज्य सरकारें पूरी नहीं कर पाई हैं। - चरण सिंह नेगी, ग्राम प्रधान, बेंजी-कांडई
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