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संस्कृति विभाग के नाम रहा महोत्सव
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राजकीय इंटर कॉलेज तैला में आयोजित तीन दिवसीय सिलगढ़ महोत्सव का दूसरा दिन उत्तराखंड संस्कृति विभाग के कलाकारों के नाम रहा। कड़ाके की ठंड के बावजूद मेला पंडाल में दर्शकों की खूब भीड़ जुटी रही। इस दौरान मेलार्थियों ने स्टॉलों से भी खरीदारी की।
महोत्सव के दूसरे दिन के कार्यक्रमों का शुभारंभ मुख्य अतिथि चारधाम विकास परिषद् के उपाध्यक्ष आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं ने किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय मेले जहां लोक संस्कृति का संरक्षण करते हैं। मेला समाज को जोड़ने का काम करता है। विशिष्ट अतिथि जिपं सदस्य कुसुम देवी, नपं अध्यक्ष अरुणा बेंजवाल और प्रधानाचार्य शिव सिंह रावत ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलता है। इसके बाद संस्कृति विभाग के कलाकारों की ओर से जय बदरी-केदारनाथ, स्तुति से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। धरती हमरा गढ़वाल की..., न उकाल, न उधार..., सैणू-सैण मेरा गौ की बाट..., पीत की कुंगली डोर छिन ये..., पर्वत जन कठोर भी छिन ये बेटी..., ब्वारी पहाड़ों... की आदि गीतों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर मेलाध्यक्ष ओपी बहुगुणा, ज्येष्ठ प्रमुख नागेंद्र पंवार, दीपक रावत, कृपाल सिंह पंवार, विनोद थपलियाल, त्रिलोक रौतेला और नरेश भट्ट आदि मौजूद रहे।
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महोत्सव के दूसरे दिन के कार्यक्रमों का शुभारंभ मुख्य अतिथि चारधाम विकास परिषद् के उपाध्यक्ष आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं ने किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय मेले जहां लोक संस्कृति का संरक्षण करते हैं। मेला समाज को जोड़ने का काम करता है। विशिष्ट अतिथि जिपं सदस्य कुसुम देवी, नपं अध्यक्ष अरुणा बेंजवाल और प्रधानाचार्य शिव सिंह रावत ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलता है। इसके बाद संस्कृति विभाग के कलाकारों की ओर से जय बदरी-केदारनाथ, स्तुति से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। धरती हमरा गढ़वाल की..., न उकाल, न उधार..., सैणू-सैण मेरा गौ की बाट..., पीत की कुंगली डोर छिन ये..., पर्वत जन कठोर भी छिन ये बेटी..., ब्वारी पहाड़ों... की आदि गीतों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर मेलाध्यक्ष ओपी बहुगुणा, ज्येष्ठ प्रमुख नागेंद्र पंवार, दीपक रावत, कृपाल सिंह पंवार, विनोद थपलियाल, त्रिलोक रौतेला और नरेश भट्ट आदि मौजूद रहे।
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