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Rudraprayag News: कच्ची दुकानें लॉटरी से देने के विरोध में आमरण अनशन शुरू

Tue, 17 Mar 2026 07:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग Updated Tue, 17 Mar 2026 07:27 PM IST
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Fast unto death begins in protest against allotment of temporary shops through lottery
रुद्रप्रयाग के केदारनाथ पैदल मार्ग पर लॉटरी के माध्यम से दुकानें आवंटित करने के विरोध में तहसील
लोग बोले, यात्रा के दौरान गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर स्थानीय ही करते हैं इसका संचालन
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लॉटरी प्रणाली लागू होने से पुराने व्यापारी इस व्यवस्था से हो जाएंगे बाहर
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊखीमठ। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर कच्ची दुकानों के आवंटन को लॉटरी प्रणाली से दिए जाने के निर्णय के विरोध में व्यापारियों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने चौबीस घंटे में आदेश निरस्त न होने पर सरकार के विरुद्ध नारेबाजी कर आमरण अनशन शुरू किया।
व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से यात्रा मार्ग पर स्थानीय लोग ही कच्ची दुकानों और टेंटों का संचालन करते आ रहे हैं जिससे उनकी आजीविका चलती है और श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलती हैं। लॉटरी प्रणाली लागू होने से कई पुराने व्यापारी इस व्यवस्था से बाहर हो जाएंगे जिससे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। इससे पहले सोमवार को व्यापारियों ने ब्लॉक सभागार में बैठक कर एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए 24 घंटे में आदेश निरस्त करने की मांग की थी। कार्रवाई न होने पर मंगलवार से तहसील परिसर में आमरण अनशन शुरू कर दिया गया। अनशन पर बैठे व्यापारियों में संदीप पुष्पाण, वीरेंद्र सिंह, जसवंत सिंह, यशपाल सिंह, जसपाल सिंह, चंद्रमोहन सिंह और प्रेम सिंह शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पूरा केदारघाटी क्षेत्र यात्रा पर निर्भर है और लॉटरी व्यवस्था से स्थानीय व्यापारियों को नुकसान होगा। इस अवसर पर व्यापार मंडल ऊखीमठ ने धरना प्रदर्शन को पूर्ण समर्थन दिया। इस अवसर पर व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव भटट, महामंत्री महेश बत्र्वाल, सुषमा देवी, वीरेन्द्र गोस्वामी, गणेश लाल, मुकेश सिंह, बिजेन्द्र राणा, महिपाल सिंह, पीएस राणा, सौरभ भट्ट समेत कई व्यवसायी उपस्थित थे।
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केदारनाथ यात्रा से मिले राजस्व के उपयोग पर उठे सवाल

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता कर सरकार और प्रशासन पर केदारनाथ यात्रा से प्राप्त राजस्व के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद कच्ची दुकानों के आवंटन में टेंडर प्रक्रिया नहीं होती थी, लेकिन अब इसे लागू कर दिया गया है। कहा कि इससे स्थानीय लोगों पर असर पड़ेगा। साथ ही पिछले 10 वर्षों से राजस्व का अधिकार जिला पंचायत से हटाकर जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है। मनोज रावत ने कहा कि घोड़ा-खच्चरों से टैक्स के रूप में करीब 40 करोड़ रुपये वसूले गए, जिनमें से अधिकांश धनराशि का उपयोग जनपद के नियोजित विकास कार्यों में नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जिस तरह घोड़ा-खच्चरों से राजस्व लिया जाता है उसी तरह हेलिकॉप्टर कंपनियों से भी राजस्व वसूला जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकानों के आवंटन और घोड़ा-खच्चरों के पंजीकरण के नाम पर गरीबों का शोषण किया जा रहा है। पहले संचालकों को 80 प्रतिशत तक बीमा सब्सिडी दी जाती थी, जो अब बंद कर दी गई है, जबकि उनसे वसूले गए राजस्व का उपयोग उनके हित में नहीं हो रहा है। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार ने इसे राजस्व वसूली का माध्यम बना दिया है।
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