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भूख, गरीबी व सेहत से निपटने में अकेले मत्स्य क्षेत्र सक्षम: डॉ. जेना
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पंतनगर में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में साहित्यों का विमोचन करते अतिथि।
- फोटो : RUDRAPUR
पंतनगर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (मत्स्यिकी) डॉ. जेके जेना ने कहा कि पिछले कुछ लाख वर्षों में जलीय व अन्य जीवों में विविधता का विकास हुआ है लेकिन वातावरण में बदलाव व अन्य कारणों से विविधता में ह्रास हो रहा है। अकेले मछली पालन से भूख, गरीबी व मानव सेहत से संबंधित समस्याओं से निपटा जा सकता है।
सोमवार को मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय की ओर से गांधी हॉल में ‘भारतीय अंतरस्थलीय जलीय पारिस्थितिकी का स्वास्थ्य एवं मात्स्यिकी : विभिन्न तनाव कारक, प्रबंधन एवं संरक्षण’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। सम्मेलन में डॉ. जेके जेना ने कहा कि जलीय पारिस्थितिकी का स्वास्थ्य उसमें मौजूद मछलियों की संख्या व उत्पादन से लगाया जाता है। जलीय पारिस्थितिकीय की ओर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने कहा कि जलीय पारिस्थितिकी अच्छी हालत में नहीं है। इसका मुख्य कारण शहरीकरण एवं विकास है।
जलीय पर्यावरण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन समिति कनाडा के डॉ. एम. मुनावर ने कहा कि समिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता द्वारा वैश्विक जलीय संसाधनों के संरक्षण एवं नई पहल को प्रोत्साहित करती है। केंद्रीय अंतरस्थलीय मत्स्यिकी अनुसंधान संस्थान बैरकपुर के डॉ. बीके दास ने कहा कि अंतरस्थलीय मत्स्यिकी का किसानों की आय को दोगुना करने में बड़ा योगदान है। केंद्रीय मत्स्यिकी अनुसंधान संस्थान मुंबई के निदेशक एवं कुलपति डॉ. गोपाल कृष्ण ने मत्स्य पालन के दौरान आने वाली समस्याओं व उनके समाधान के लिए हुए प्रयासों की समीक्षा की। सम्मेलन में देश-विदेश के उच्च शिक्षण व अनुसंधान संस्थानों के करीब 250 वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं उत्तराखंड के 100 मत्स्य पालक एवं कृषक मौजूद रहे।
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प्रगतिशील मत्स्य पालकों को किया सम्मानित
पंतनगर। अतिथियों ने स्मारिका एवं अन्य साहित्यों का विमोचन करने के अलावा क्षेत्र के प्रगतिशील मत्स्य पालकों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में रीता देवी, मधु एवं रेखा राणा निवासी ग्राम कटघरिया सितारगंज, गजेंद्र टम्टा हल्द्वानी, हेमचंद्र आर्या नैनीताल और रजत कचूरा रुद्रपुर शामिल रहे। व्यावसायिक मत्स्य स्नातक मंच, मुंबई की ओर से वर्ष 2017-18 व 2019 के लिए देश के विभिन्न मत्स्य महाविद्यालयों के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह और प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया गया।
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सोमवार को मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय की ओर से गांधी हॉल में ‘भारतीय अंतरस्थलीय जलीय पारिस्थितिकी का स्वास्थ्य एवं मात्स्यिकी : विभिन्न तनाव कारक, प्रबंधन एवं संरक्षण’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। सम्मेलन में डॉ. जेके जेना ने कहा कि जलीय पारिस्थितिकी का स्वास्थ्य उसमें मौजूद मछलियों की संख्या व उत्पादन से लगाया जाता है। जलीय पारिस्थितिकीय की ओर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने कहा कि जलीय पारिस्थितिकी अच्छी हालत में नहीं है। इसका मुख्य कारण शहरीकरण एवं विकास है।
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जलीय पर्यावरण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन समिति कनाडा के डॉ. एम. मुनावर ने कहा कि समिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता द्वारा वैश्विक जलीय संसाधनों के संरक्षण एवं नई पहल को प्रोत्साहित करती है। केंद्रीय अंतरस्थलीय मत्स्यिकी अनुसंधान संस्थान बैरकपुर के डॉ. बीके दास ने कहा कि अंतरस्थलीय मत्स्यिकी का किसानों की आय को दोगुना करने में बड़ा योगदान है। केंद्रीय मत्स्यिकी अनुसंधान संस्थान मुंबई के निदेशक एवं कुलपति डॉ. गोपाल कृष्ण ने मत्स्य पालन के दौरान आने वाली समस्याओं व उनके समाधान के लिए हुए प्रयासों की समीक्षा की। सम्मेलन में देश-विदेश के उच्च शिक्षण व अनुसंधान संस्थानों के करीब 250 वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं उत्तराखंड के 100 मत्स्य पालक एवं कृषक मौजूद रहे।
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प्रगतिशील मत्स्य पालकों को किया सम्मानित
पंतनगर। अतिथियों ने स्मारिका एवं अन्य साहित्यों का विमोचन करने के अलावा क्षेत्र के प्रगतिशील मत्स्य पालकों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में रीता देवी, मधु एवं रेखा राणा निवासी ग्राम कटघरिया सितारगंज, गजेंद्र टम्टा हल्द्वानी, हेमचंद्र आर्या नैनीताल और रजत कचूरा रुद्रपुर शामिल रहे। व्यावसायिक मत्स्य स्नातक मंच, मुंबई की ओर से वर्ष 2017-18 व 2019 के लिए देश के विभिन्न मत्स्य महाविद्यालयों के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह और प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया गया।