द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान 250 से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बाबा की चल उत्सव विग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करते हुए गौंडार पहुंच गई है। वहां पर स्कूली बच्चों व ग्रामीणों ने आराध्य का स्वागत किया। बाबा की डोली शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए 25 नवंबर को ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान हो जाएगी।
सोमवार सुबह 5 बजे मद्महेश्वर में पुजारी शिव लिंग ने आराध्य की पूजा-अर्चना करते हुए शृंगार किया। वेदपाठी मृत्युंजय हीरामठ वेदमंत्रोच्चारण के बीच आराध्य की महाअभिषेक आरती की गई। इसके बाद धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ भगवान के स्वयंभू लिंग को पुष्प, अक्षत व भस्म से समाधि रूप देने के साथ ही भोग मूर्तियों को चल उत्सव विग्रह डोली में रखे सभा मंडप में विराजमान किया। मौके पर मंदिर परिसर में मौजूद 250 श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर घर, परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह 8 बजे वृश्चिक लग्न में द्वितीय केदार मद्महेश्वर मंदिर के कपाट विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। मौके पर पूरा क्षेत्र आराध्य के जयकारों से गूंज उठा। साथ ही बाबा की चल उत्सव विग्रह डोली ने मंदिर की तीन परिक्रमा के साथ ही अपने ताम्रपात्रों व भंडार का निरीक्षण करने के बाद शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया। बाबा की डोली देवदर्शनी, खटरा, नानू, खुन्नू, बणतोली होते हुए पूर्वाह्न 11.30 बजे अपने पहले पड़ाव गौंडार गांव पहुंची। वहां पर राजकीय प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल गौंडार के छात्र-छात्राओं ने बैंड धुनों और बाबा के जयकारों के साथ डोली की अगवानी की। साथ ही पंचायत चौक में ग्रामीणों ने आराध्य को सामूहिक अर्घ्य भी लगाया। इस मौके पर देवस्थानम बोर्ड के मंदिर सुपरवाइजर युद्धवीर सिंह पुष्पवाण, डोली प्रभारी पारेश्वर त्रिवेदी, राजीव भट्ट, रवींद्र पंवार, भंडारी मदन सिंह पंवार, ग्राम प्रधान वीर सिंह पंवार, संदीप बर्त्वाल, भगत सिंह पंवार, बब्बू बर्त्वाल आदि मौजूद थे।