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आज रात्रि प्रवास के लिए गिरीया गांव पहुंचेगी मद्महेश्वर की डोली
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मंगलवार को अपने दूसरे पड़ाव राकेश्वरी मंदिर रांसी गांव पहुंची द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर क?
- फोटो : RUDRAPRYAG
द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की चल उत्सव विग्रह डोली रात्रि प्रवास के लिए रांसी गांव स्थित राकेश्वरी मंदिर पहुंच गई है। मौके पर ग्रामीणों ने आराध्य का स्वागत करते हुए सामूहिक रूप से अर्घ्य भी लगाया। बुधवार को बाबा मद्महेश्वर की डोली गिरीया गांव में प्रवास करेगी। 25 नवंबर को द्वितीय केदार छह माह की शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान हो जाएंगे।
मंगलवार को सुबह 9 बजे से गौंडार गांव में द्वितीय केदार मद्महेश्वर भगवान की पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। मुख्य पुजारी शिवलिंग ने चल उत्सव विग्रह डोली और भोगमूर्ति स्वरूप आराध्य की षोड़षोपचार पूजा कर बाल भोग लगाया। वेदपाठी मृत्युंजय हीरेमठ के वेद मंत्रोच्चारण के बीच रुद्राभिषेक व महाभोग की परंपराओं का निर्वहन किया गया। इसके बाद पुजारी व अन्य लोगों द्वारा चल उत्सव विग्रह डोली का शृंगार किया गया। इस अवसर पर पूरा गांव आराध्य के जयकारों से गूंज उठा। पूर्वाह्न 11 बजे भक्तों के जयकारों के बीच द्वितीय केदार की डोली ने गौंडार गांव से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए प्रस्थान किया। अखतोली धार होते हुए बाबा मद्महेश्वर की चल उत्सव विग्रह डोली दोपहर बाद 2 बजे राकेश्वरी मंदिर रांसी गांव पहुंची। वहां आराध्य का स्वागत करते हुए ग्रामीणों ने मंदिर में भगवान मद्महेश्वर को सामूहिक अर्घ्य लगाया। सभी धार्मिक परंपराओं के साथ डोली को राकेश्वरी मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया गया। शाम को मद्महेश्वर भगवान व माता राकेश्वरी देवी की संयुक्त पूजा कर आरती उतारी गई। इस मौके पर पुजारी शिव शंकर लिंग, डोली प्रभारी पारेश्वर त्रिवेदी, शिव सिंह रावत, मदन भंडारी, रवि भट्ट, सूरज नेगी, बृजमोहन आदि मौजूद थे।
महिला व युवक मंगल दलों के नाम रहा दूसरा दिन
ऊखीमठ। मनसूना में आयोजित तीन दिवसीय मेले के दूसरे दिन स्कूली बच्चों के साथ ही महिला व युवक मंगल दलों के कार्यक्रमों की धूम रही। कलाकारों ने देवभूमि उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर आधारित गीत व नृत्य की प्रस्तुतियों से मेलार्थियों का मनोरंजन कर तालियां बटोरीं। मंगलवार को मनसूना, गिरीया, बुरूवा समेत अन्य गांवों के महिला मंगल दलों ने चांछड़ी, थड्या, चौंफला की प्रस्तुतियां दीं। मुख्य अतिथि पूर्व विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि मद्महेश्वर घाटी सदियों से आध्यात्म व सामाजिक परंपराओं से जुड़ा क्षेत्र है। बुधवार को बाबा मद्महेश्वर की डोली आगमन के साथ मेले का समापन हो जाएगा। जिपं सदस्य विनोद राणा ने बताया कि मेले का उद्देश्य रंगमंच से जुड़ी प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है। मौके पर गजपाल सिंह रावत, दर्शनी पंवार, देवेंद्र पंवार, सुरेशी रावत, अवतार सिंह राणा, विनोद गुरियाल आदि मौजूद थे।
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आज से शुरू होगा मद्महेश्वर मेला
द्वितीय केदार मद्महेश्वर के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ आगमन पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आज से शुरू होगा। मेलाध्यक्ष/नगर पंचायत अध्यक्ष विजय राणा व सचिव प्रकाश रावत ने बताया कि मेले की सभी तैयारियां पूरी कर दी गई हैं। मेले का शुभारंभ केदारनाथ के रावल करेंगे।
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मंगलवार को सुबह 9 बजे से गौंडार गांव में द्वितीय केदार मद्महेश्वर भगवान की पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। मुख्य पुजारी शिवलिंग ने चल उत्सव विग्रह डोली और भोगमूर्ति स्वरूप आराध्य की षोड़षोपचार पूजा कर बाल भोग लगाया। वेदपाठी मृत्युंजय हीरेमठ के वेद मंत्रोच्चारण के बीच रुद्राभिषेक व महाभोग की परंपराओं का निर्वहन किया गया। इसके बाद पुजारी व अन्य लोगों द्वारा चल उत्सव विग्रह डोली का शृंगार किया गया। इस अवसर पर पूरा गांव आराध्य के जयकारों से गूंज उठा। पूर्वाह्न 11 बजे भक्तों के जयकारों के बीच द्वितीय केदार की डोली ने गौंडार गांव से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए प्रस्थान किया। अखतोली धार होते हुए बाबा मद्महेश्वर की चल उत्सव विग्रह डोली दोपहर बाद 2 बजे राकेश्वरी मंदिर रांसी गांव पहुंची। वहां आराध्य का स्वागत करते हुए ग्रामीणों ने मंदिर में भगवान मद्महेश्वर को सामूहिक अर्घ्य लगाया। सभी धार्मिक परंपराओं के साथ डोली को राकेश्वरी मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया गया। शाम को मद्महेश्वर भगवान व माता राकेश्वरी देवी की संयुक्त पूजा कर आरती उतारी गई। इस मौके पर पुजारी शिव शंकर लिंग, डोली प्रभारी पारेश्वर त्रिवेदी, शिव सिंह रावत, मदन भंडारी, रवि भट्ट, सूरज नेगी, बृजमोहन आदि मौजूद थे।
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महिला व युवक मंगल दलों के नाम रहा दूसरा दिन
ऊखीमठ। मनसूना में आयोजित तीन दिवसीय मेले के दूसरे दिन स्कूली बच्चों के साथ ही महिला व युवक मंगल दलों के कार्यक्रमों की धूम रही। कलाकारों ने देवभूमि उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर आधारित गीत व नृत्य की प्रस्तुतियों से मेलार्थियों का मनोरंजन कर तालियां बटोरीं। मंगलवार को मनसूना, गिरीया, बुरूवा समेत अन्य गांवों के महिला मंगल दलों ने चांछड़ी, थड्या, चौंफला की प्रस्तुतियां दीं। मुख्य अतिथि पूर्व विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि मद्महेश्वर घाटी सदियों से आध्यात्म व सामाजिक परंपराओं से जुड़ा क्षेत्र है। बुधवार को बाबा मद्महेश्वर की डोली आगमन के साथ मेले का समापन हो जाएगा। जिपं सदस्य विनोद राणा ने बताया कि मेले का उद्देश्य रंगमंच से जुड़ी प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है। मौके पर गजपाल सिंह रावत, दर्शनी पंवार, देवेंद्र पंवार, सुरेशी रावत, अवतार सिंह राणा, विनोद गुरियाल आदि मौजूद थे।
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आज से शुरू होगा मद्महेश्वर मेला
द्वितीय केदार मद्महेश्वर के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ आगमन पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आज से शुरू होगा। मेलाध्यक्ष/नगर पंचायत अध्यक्ष विजय राणा व सचिव प्रकाश रावत ने बताया कि मेले की सभी तैयारियां पूरी कर दी गई हैं। मेले का शुभारंभ केदारनाथ के रावल करेंगे।