{"_id":"60e30ae18ebc3eff1c7cc28c","slug":"did-not-take-care-of-pitru-kund-after-the-disaster-rudrapryag-news-drn3835525137","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदा के बाद से नहीं ली पितृ कुंड की सुध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदा के बाद से नहीं ली पितृ कुंड की सुध
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव गौरीकुंड में पितृ कुंड का आठ वर्ष बाद भी पुनरोद्धार नहीं हो पाया है। कूड़े-कचरे से पटे कुंड के चारों तरफ पत्थर बिखरे हुए हैं। तप्तकुंड का पुनर्निर्माण भी अधूरा पड़ा हुआ है। हक-हकूकधारियों व ग्रामीणों/व्यापारियों ने शासन-प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया है।
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर गुप्तकाशी से 36 किमी की दूरी पर स्थित गौरीकुंड का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां आराध्य मां भगवती गौरी का प्राचीन मंदिर है। साथ ही पितृ कुंड व तप्तकुंड सहित तीन प्राचीन कुंड हैं, लेकिन केदारनाथ आपदा के बाद से इनकी शासन-प्रशासन ने सुध नहीं ली है। रविग्राम निवासी व हक-हकूकधारी विजय जमलोकी, नरेंद्र दत्त, शंभू प्रसाद, अरविंद जमलोकी, विनोद प्रसाद का कहना है कि आपदा के बाद से पितृ कुंड (पीला कुंड) का आज तक पुनरोद्धार नहीं किया गया है। उन्होंने सरकार से अन्यत्र भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है, जिससे वे दुकान आदि का संचालन कर यात्राकाल में अपनी आजीविका शुरू कर सके। गुप्तकाशी व्यापार संघ अध्यक्ष अरविंद गोस्वामी का कहना है कि आपदा के बाद से तप्तकुंड व पितृ कुंड के संरक्षण के लिए योजना नहीं बन पाई है।
गौरीकुंड के विकास व वहां मौजूद धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री से भेंट की जाएगी। साथ ही विधायक निधि से भी यहां पर जल्द ही कुछ जरूरी कार्य कराए जाएंगे।
विज्ञापन
- मनोज रावत, विधायक केदारनाथ विस
विज्ञापन
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर गुप्तकाशी से 36 किमी की दूरी पर स्थित गौरीकुंड का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां आराध्य मां भगवती गौरी का प्राचीन मंदिर है। साथ ही पितृ कुंड व तप्तकुंड सहित तीन प्राचीन कुंड हैं, लेकिन केदारनाथ आपदा के बाद से इनकी शासन-प्रशासन ने सुध नहीं ली है। रविग्राम निवासी व हक-हकूकधारी विजय जमलोकी, नरेंद्र दत्त, शंभू प्रसाद, अरविंद जमलोकी, विनोद प्रसाद का कहना है कि आपदा के बाद से पितृ कुंड (पीला कुंड) का आज तक पुनरोद्धार नहीं किया गया है। उन्होंने सरकार से अन्यत्र भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है, जिससे वे दुकान आदि का संचालन कर यात्राकाल में अपनी आजीविका शुरू कर सके। गुप्तकाशी व्यापार संघ अध्यक्ष अरविंद गोस्वामी का कहना है कि आपदा के बाद से तप्तकुंड व पितृ कुंड के संरक्षण के लिए योजना नहीं बन पाई है।
विज्ञापन
गौरीकुंड के विकास व वहां मौजूद धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री से भेंट की जाएगी। साथ ही विधायक निधि से भी यहां पर जल्द ही कुछ जरूरी कार्य कराए जाएंगे।
विज्ञापन
- मनोज रावत, विधायक केदारनाथ विस