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खेती के लिए उपलब्ध संसाधनों का संरक्षण जरूरी : डॉ. कुमार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 22 Nov 2019 12:24 AM IST
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Conservation In Agriculture
पंतनगर में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में बोलते वैज्ञानिक। - फोटो : RUDRAPUR
पंतनगर। देश में कृषि योग्य उपलब्ध भूमि सिर्फ 60 प्रतिशत है और वह भी वर्तमान में कृषि के लिए उपलब्ध नहीं है। साथ ही जल उपलब्धता व भूमि की उर्वरता में निरंतर कमी आ रही है। इन सभी परिस्थितियों केे मद्देनजर खेती के लिए प्रयुक्त एवं उपलब्ध संसाधनों के संरक्षण पर बल दिया जाना आवश्यक है। यह बात अधिष्ठाता कृषि डॉ. जे कुमार ने विवि स्थित कृषि महाविद्यालय के सस्य विज्ञान विभाग में उच्च संकाय की ओर से ‘खाद्य पोषण एवं किसानों की आय बढ़ाने के लिए सस्य विज्ञान का हस्तक्षेप’ विषयक 21-दिवसीय प्रशिक्षण में कहीं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से 24 वैज्ञानिक प्रतिभाग कर रहे हैं।
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डॉ. केसी शर्मा सभागार में आयोजित प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ करते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि भारत में पशुुओं और पौधों की प्रजातियों के करीब आठ प्रतिशत भाग में जैव विविधता विद्यमान है। जिसमें लगभग एक चौथाई भाग की आबादी गरीबी रेखा से नीचे है और लगभग 80 प्रतिशत सूखे, बाढ़ और चक्रवात की चपेट में है। भारत में 60 प्रतिशत खेती वर्षा आधारित है जो मानसून, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन व कमी से प्रभावित होती है। पैदावार में कमी का कारण खराब उत्पादकता, पोषक तत्वों की कमी व जलवायु परिवर्तन है।
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प्रशिक्षण निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. केएस शेखर ने कहा कि सस्य विज्ञान विभाग विवि का प्रथम विभाग है, जो अनेक शोध पत्रों के प्रकाशन समेत विभिन्न तकनीकों का विकास कर चुका है। डॉ. शेखर ने वर्तमान में अपनाई जाने वाली कृषि प्रणालियों में नवीन तकनीकों के समावेश पर बल देते हुए कहा कि सस्य विज्ञान खाद्य पोषण व किसानों की आय में वृद्धि का उचित माध्यम हो सकता है। भारत में वर्तमान में 284 मिलियन टन खाद्यान्न का उत्पादन हो रहा है, जिसे वर्ष 2050 तक 430 मिलियन टन करने की जरूरत होगी। कहा कि बीज, उर्वरक, सिंचाई व अधिक उपज देने वाली किस्मों और कृषि निवेशों का विवेकपूर्ण उपयोग भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
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इससे पूर्व प्राध्यापक डॉ. अनिल शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण के विषय में विस्तृत जानकारी दी। अंत में सह प्राध्यापक डा. चंद्र भूषण ने सभी उपस्थित गणमान्य आगंतुकों व विद्यार्थियों का धन्यवाद किया।
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